Jumma Ki Namaz Ki Rakat: जुमा की नमाज़ में कुल 14 रकात होती हैं: 4 सुन्नत (ख़ुतबे से पहले), 2 फ़र्ज़ (जमाअत से), 4 सुन्नत, 2 सुन्नत और 2 नफ़्ल। जुमे के दिन ज़ुहर की जगह जुमा पढ़ा जाता है। नीचे पूरी तरतीब, नियत, आदाब और फ़ज़ीलत हदीस के साथ है।
Jumma Ki Namaz Ki Rakat: एक नज़र में
| क्रम | रकात | क़िस्म | हुक्म |
|---|---|---|---|
| 1 | 4 | सुन्नत-ए-मुअक्कदा | ख़ुतबे से पहले |
| 2 | 2 | फ़र्ज़ | ख़ुतबे के बाद, इमाम के साथ |
| 3 | 4 | सुन्नत-ए-मुअक्कदा | फ़र्ज़ के बाद |
| 4 | 2 | सुन्नत | उसके बाद |
| 5 | 2 | नफ़्ल | पढ़ें तो सवाब |
कुल: 14 रकात। जुमा के 2 फ़र्ज़ सिर्फ़ जमाअत के साथ अदा होते हैं, अकेले नहीं।

जुमा की नमाज़ पढ़ने की तरतीब
- मस्जिद में दाख़िल होकर (वक़्त हो तो) तहिय्यतुल मस्जिद/वुज़ू की 2 रकात पढ़ें।
- फिर ख़ुतबे से पहले 4 रकात सुन्नत पढ़ें।
- ख़ुतबा ख़ामोशी से सुनें, इस दौरान बात न करें।
- इमाम के साथ 2 रकात फ़र्ज़ पढ़ें।
- फिर 4 रकात सुन्नत, उसके बाद 2 रकात सुन्नत, और आख़िर में 2 रकात नफ़्ल पढ़ें।
जुमा की नमाज़ की नियत
फ़र्ज़ की नियत: “नियत की मैंने दो रकात नमाज़ फ़र्ज़ जुमा की, वास्ते अल्लाह तआला के, पीछे इस इमाम के, मुँह मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर।”
नियत असल में दिल के इरादे का नाम है। ज़बान से कहना ज़रूरी नहीं, लेकिन कह लेना बेहतर है। पूरी जानकारी: जुमा की नमाज़ की नियत
जुमा की नमाज़ का वक़्त
जुमा का वक़्त वही है जो ज़ुहर का है: ज़वाल के बाद से अस्र का वक़्त शुरू होने तक। हर मस्जिद में जुमे का ख़ुतबा और जमाअत का वक़्त अलग हो सकता है, इसलिए अपनी मस्जिद का वक़्त पता रखें।
जुमा की नमाज़ की फ़ज़ीलत
- गुनाहों की माफ़ी: जो जुमे के दिन ग़ुस्ल करे, जल्दी जाए, ख़ामोशी से ख़ुतबा सुने और नमाज़ पढ़े, उसके इस जुमे से पिछले जुमे तक के गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं। (सहीह बुख़ारी: 883)
- जुमा छोड़ने की वईद: जो लापरवाही से तीन जुमे छोड़ दे, अल्लाह उसके दिल पर मुहर लगा देता है। (अबू दाऊद: 1052)
- जुमे के बाद की सुन्नत: नबी ﷺ ने फ़रमाया: तुममें से जो जुमे के बाद नमाज़ पढ़े, वो 4 रकात पढ़े। (सहीह मुस्लिम: 881)
जुमे के दिन के आदाब
- ग़ुस्ल करें, साफ़ कपड़े पहनें और ख़ुशबू लगाएँ।
- मस्जिद जल्दी पहुँचें, पहले आने वालों को ज़्यादा सवाब है।
- ख़ुतबे के दौरान बिल्कुल ख़ामोश रहें, मोबाइल भी न देखें।
- जुमे के दिन दुरूद शरीफ़ ज़्यादा पढ़ें।
- जुमे के दिन सूरह कहफ़ पढ़ने की फ़ज़ीलत हदीसों में आई है।
औरतों के लिए: औरतों पर जुमा फ़र्ज़ नहीं है, वो घर पर ज़ुहर की 12 रकात पढ़ें। देखें: ज़ुहर की रकात
5 वक़्त की नमाज़ की कुल रकात
| नमाज़ | कुल रकात |
|---|---|
| फ़ज्र | 4 |
| ज़ुहर | 12 |
| अस्र | 8 |
| मग़रिब | 7 |
| ईशा | 17 |
| जुमा (ज़ुहर की जगह) | 14 |
सुन्नत, फ़र्ज़ और नफ़्ल का पूरा चार्ट: नमाज़ की रकात चार्ट
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
जुमा की नमाज़ में कितनी रकात होती हैं?
कुल 14 रकात: 4 सुन्नत, 2 फ़र्ज़, 4 सुन्नत, 2 सुन्नत और 2 नफ़्ल।
जुमा में फ़र्ज़ कितनी रकात हैं?
2 रकात फ़र्ज़, जो इमाम के साथ जमाअत से पढ़ी जाती हैं।
अगर जुमा की जमाअत छूट जाए तो?
जुमा अकेले नहीं पढ़ा जाता। जमाअत छूट जाए तो ज़ुहर की 4 रकात फ़र्ज़ पढ़ें।
क्या औरतों पर जुमा फ़र्ज़ है?
नहीं, औरतें जुमे के दिन ज़ुहर पढ़ेंगी।
ख़ुतबे के दौरान सुन्नत पढ़ सकते हैं?
हनफ़ी मसलक में ख़ुतबा शुरू होने के बाद नमाज़ न पढ़ें, ख़ामोशी से ख़ुतबा सुनें।
मुसाफ़िर पर जुमा फ़र्ज़ है?
मुसाफ़िर पर जुमा फ़र्ज़ नहीं, लेकिन अगर पढ़ ले तो ज़ुहर की जगह अदा हो जाएगा।
आख़िरी बात
जुमा हफ़्ते की ईद है। ग़ुस्ल करके जल्दी मस्जिद जाएँ, ख़ुतबा ध्यान से सुनें और 14 रकात पूरी पढ़ें। एक जुमे से अगले जुमे तक के गुनाहों की माफ़ी का ये बेहतरीन मौक़ा न गँवाएँ।
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