Tahajjud Ki Namaz Ki Rakat: तहज्जुद की नमाज़ कम से कम 2 रकात है, और इसकी कोई सख़्त हद नहीं। नबी ﷺ आम तौर पर 8 रकात तहज्जुद और फिर 3 वित्र, यानी कुल 11 रकात पढ़ते थे। (सहीह बुख़ारी: 1147) तहज्जुद 2-2 रकात करके पढ़ी जाती है। नीचे तरतीब, वक़्त, नियत और फ़ज़ीलत हदीस के साथ है।
Tahajjud Ki Namaz Ki Rakat: एक नज़र में
| क्रम | रकात | क़िस्म | हुक्म |
|---|---|---|---|
| कम से कम | 2 | नफ़्ल (सुन्नत-ए-ग़ैर-मुअक्कदा) | 2 रकात भी काफ़ी हैं |
| आम तौर पर | 4, 6 या 8 | 2-2 रकात करके | जितनी हिम्मत हो |
| नबी ﷺ की आदत | 8 + 3 वित्र = 11 | बुख़ारी: 1147 | सबसे बेहतर |
| कभी-कभी | 10/13 तक | बुख़ारी: 1138 | जायज़ |
कुल: 2 से 12 (सुन्नत: 8 + 3 वित्र) रकात। तहज्जुद फ़र्ज़ नहीं, लेकिन फ़र्ज़ के बाद सबसे अफ़ज़ल नमाज़ है।

तहज्जुद की नमाज़ पढ़ने की तरतीब
- ईशा पढ़कर सो जाएँ। तहज्जुद असल में सोकर उठने के बाद की नमाज़ है।
- रात के आख़िरी हिस्से में उठें, वुज़ू करें और तहज्जुद की दुआ पढ़ें।
- 2-2 रकात करके पढ़ें। नबी ﷺ ने फ़रमाया: रात की नमाज़ दो-दो रकात है। (सहीह बुख़ारी: 990)
- अपनी हिम्मत के मुताबिक़ 2, 4, 6 या 8 रकात पढ़ें।
- अगर ईशा के साथ वित्र नहीं पढ़ा था, तो आख़िर में 3 रकात वित्र पढ़ें। (सहीह मुस्लिम: 755)
- फिर दुआ और इस्तिग़फ़ार करें, ये दुआ क़बूल होने का ख़ास वक़्त है।
तहज्जुद की नमाज़ की नियत
“नियत की मैंने दो रकात नमाज़ तहज्जुद की, सुन्नत रसूलुल्लाह ﷺ की, वास्ते अल्लाह तआला के, मुँह मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर।” हर दो रकात के लिए यही नियत करें।
नियत असल में दिल के इरादे का नाम है। ज़बान से कहना ज़रूरी नहीं, लेकिन कह लेना बेहतर है। पूरी जानकारी: तहज्जुद की नमाज़ की नियत
तहज्जुद की नमाज़ का वक़्त
तहज्जुद का वक़्त ईशा के बाद से सुबह सादिक़ (फ़ज्र) तक है, लेकिन सबसे बेहतर रात का आख़िरी तिहाई हिस्सा है। मसलन अगर मग़रिब 6 बजे और फ़ज्र 5 बजे है, तो रात 11 घंटे की है, और आख़िरी तिहाई लगभग रात 1:20 से शुरू होगा।
तहज्जुद की नमाज़ की फ़ज़ीलत
- फ़र्ज़ के बाद सबसे अफ़ज़ल: फ़र्ज़ नमाज़ के बाद सबसे अफ़ज़ल नमाज़ रात की नमाज़ है। (सहीह मुस्लिम: 1163)
- अल्लाह की ख़ास रहमत: हमारा रब हर रात आख़िरी तिहाई हिस्से में आसमान-ए-दुनिया पर नुज़ूल फ़रमाता है और कहता है: कौन है जो मुझसे दुआ करे कि मैं क़बूल करूँ, कौन माँगे कि मैं दूँ, कौन माफ़ी माँगे कि मैं माफ़ करूँ। (सहीह बुख़ारी: 1145)
- मियाँ-बीवी के लिए: जो शख़्स रात को उठे और अपनी बीवी को जगाए और दोनों 2-2 रकात पढ़ें, तो वो अल्लाह का कसरत से ज़िक्र करने वालों में लिख दिए जाते हैं। (अबू दाऊद: 1309)
क्या ईशा के बाद सोए बिना तहज्जुद पढ़ सकते हैं?
तहज्जुद का असल मतलब नींद से उठकर पढ़ना है। अगर किसी को रात में उठने की उम्मीद न हो, तो वो ईशा के बाद सोने से पहले कुछ नफ़्ल पढ़ ले, उसे रात की नमाज़ (क़ियामुल लैल) का सवाब मिलेगा। लेकिन बेहतर यही है कि थोड़ा सोकर उठें।
5 वक़्त की नमाज़ की कुल रकात
| नमाज़ | कुल रकात |
|---|---|
| फ़ज्र | 4 |
| ज़ुहर | 12 |
| अस्र | 8 |
| मग़रिब | 7 |
| ईशा | 17 |
| जुमा (ज़ुहर की जगह) | 14 |
सुन्नत, फ़र्ज़ और नफ़्ल का पूरा चार्ट: नमाज़ की रकात चार्ट
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
तहज्जुद की नमाज़ में कितनी रकात होती हैं?
कम से कम 2 रकात। नबी ﷺ आम तौर पर 8 रकात और फिर 3 वित्र पढ़ते थे (बुख़ारी: 1147)।
तहज्जुद कितनी-कितनी रकात करके पढ़ें?
2-2 रकात करके, हर दो रकात पर सलाम फेरें (बुख़ारी: 990)।
तहज्जुद का सबसे अच्छा वक़्त कौन सा है?
रात का आख़िरी तिहाई हिस्सा, फ़ज्र से पहले।
क्या तहज्जुद फ़र्ज़ है?
नहीं, तहज्जुद फ़र्ज़ नहीं है, लेकिन फ़र्ज़ के बाद सबसे अफ़ज़ल नमाज़ है (मुस्लिम: 1163)।
क्या तहज्जुद के बाद वित्र पढ़ें?
अगर उठने का पक्का यक़ीन हो तो वित्र तहज्जुद के बाद पढ़ना बेहतर है, वरना ईशा के साथ पढ़ लें (मुस्लिम: 755)।
तहज्जुद में कौन सी सूरह पढ़ें?
कोई भी सूरह पढ़ सकते हैं। जितना क़ुरआन याद हो, लंबी क़िरात करना बेहतर है।
आख़िरी बात
तहज्जुद के लिए 8 रकात ज़रूरी नहीं। शुरुआत 2 रकात से करें, हफ़्ते में एक-दो रात से। जब अल्लाह ख़ुद पुकार रहा हो कि “कौन है जो माँगे”, उस वक़्त उठकर दो रकात पढ़ लेना बहुत बड़ी नेमत है।
ये भी पढ़ें: तहज्जुद की नमाज़ का तरीका | तहज्जुद की दुआ | तहज्जुद की नियत | वित्र का तरीका
1 thought on “Tahajjud Ki Namaz Ki Rakat Kitni Hoti Hai? (कम से कम 2, सुन्नत 8 + वित्र)”
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