Nazar Ki Dua in Hindi: नज़र से बचने और नज़र उतारने की दुआ

Nazar Ki Dua: बुरी नज़र से हिफ़ाज़त के लिए ये दुआ पढ़ें: “अऊज़ु बि कलिमातिल्लाहित ताम्मति मिन कुल्लि शैतानिंव व हाम्मतिंव व मिन कुल्लि ऐनिल लाम्मह”। नबी ﷺ अपने नवासों हज़रत हसन और हज़रत हुसैन (रज़ि.) पर यही दुआ पढ़कर दम करते थे। (सहीह बुख़ारी: 3371)

नबी ﷺ ने फ़रमाया: “नज़र का लगना हक़ (सच) है।” (सहीह बुख़ारी: 5740, सहीह मुस्लिम: 2187) इसलिए इस पोस्ट में नज़र से बचने की दुआ, नज़र उतारने की दुआ, और बच्चों की नज़र उतारने का सुन्नत तरीका, सब हदीस के हवाले के साथ बताया गया है।

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नज़र की दुआएँ एक नज़र में

किस लिएदुआहवाला
बुरी नज़र से हिफ़ाज़तअऊज़ु बि कलिमातिल्लाहित ताम्मति…बुख़ारी: 3371
किसी चीज़ को देखकर नज़र न लगेमाशाअल्लाह ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह / बारकल्लाहसूरह कहफ़ 18:39
नज़र उतारने की दुआ (रुक़्या)बिस्मिल्लाहि अरक़ीक…मुस्लिम: 2186
नज़र और हर बुराई से हिफ़ाज़तसूरह फ़लक़ और सूरह नासतिर्मिज़ी: 2058

Nazar Ki Dua in Arabic (नज़र से बचने की दुआ)

أَعُوْذُ بِكَلِمَاتِ اللّٰهِ التَّامَّةِ مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ وَّهَامَّةٍ وَّمِنْ كُلِّ عَيْنٍ لَّامَّةٍ

Nazar Ki Dua In Hindi

Nazar Ki Dua in Hindi

अऊज़ु बि कलिमातिल्लाहित ताम्मति मिन कुल्लि शैतानिंव व हाम्मतिंव व मिन कुल्लि ऐनिल लाम्मह

Nazar Ki Dua in Roman English

A’oozu bi kalimatillahit-tammati min kulli shaitanin wa hammatin, wa min kulli ‘ainin lammah

नज़र की दुआ का तर्जुमा

मैं अल्लाह के मुकम्मल कलिमात की पनाह में आता हूँ, हर शैतान से, हर ज़हरीले (नुक़सान पहुँचाने वाले) जानवर से, और हर लग जाने वाली बुरी नज़र से।

किसके लिए कैसे पढ़ें: अपने लिए “अऊज़ु” कहें। एक लड़के पर दम करें तो “उईज़ुका”, एक लड़की पर “उईज़ुकि”, और दो बच्चों पर “उईज़ुकुमा” कहें। नबी ﷺ ने हसन-हुसैन (रज़ि.) पर “उईज़ुकुमा” पढ़ा था।

नज़र से बचने की दुआ: किसी चीज़ को देखकर क्या कहें?

अक्सर नज़र अनजाने में लग जाती है, जब हम किसी के बच्चे, घर या कामयाबी की तारीफ़ करते हैं। इससे बचने का तरीका ये है कि अच्छी चीज़ देखकर बरकत की दुआ दें:

مَا شَاءَ اللّٰهُ لَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللّٰهِ

हिंदी: माशाअल्लाहु ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह (सूरह कहफ़ 18:39)
तर्जुमा: जो अल्लाह ने चाहा (वही हुआ), अल्लाह की मदद के बिना कोई ताक़त नहीं।

एक सहाबी की नज़र दूसरे सहाबी को लग गई थी, तो नबी ﷺ ने फ़रमाया: “तुमने बरकत की दुआ क्यों नहीं दी?” (इब्न माजा: 3509) इसलिए किसी की अच्छी चीज़ देखें तो “बारकल्लाहु फ़ीह” या “अल्लाहुम्मा बारिक अलैह” (ऐ अल्लाह, इसमें बरकत दे) भी कहें।

नज़र उतारने की दुआ

अगर किसी को नज़र लग जाए, तो उस पर ये दुआ पढ़कर दम करें। ये वो दुआ है जो हज़रत जिब्रील (अलैहिस्सलाम) ने नबी ﷺ पर पढ़ी थी: (सहीह मुस्लिम: 2186)

بِسْمِ اللّٰهِ أَرْقِيْكَ، مِنْ كُلِّ شَيْءٍ يُّؤْذِيْكَ، مِنْ شَرِّ كُلِّ نَفْسٍ أَوْ عَيْنِ حَاسِدٍ، اَللّٰهُ يَشْفِيْكَ، بِسْمِ اللّٰهِ أَرْقِيْكَ

हिंदी: बिस्मिल्लाहि अरक़ीक, मिन कुल्लि शैइंय युअज़ीक, मिन शर्रि कुल्लि नफ़्सिन औ ऐनि हासिद, अल्लाहु यश्फ़ीक, बिस्मिल्लाहि अरक़ीक

तर्जुमा: अल्लाह के नाम से मैं तुम पर दम करता हूँ, हर उस चीज़ से जो तुम्हें तकलीफ़ दे, हर (बुरे) नफ़्स या हसद करने वाली आँख की बुराई से। अल्लाह तुम्हें शिफ़ा दे। अल्लाह के नाम से मैं तुम पर दम करता हूँ।

हज़रत आइशा (रज़ि.) फ़रमाती हैं कि नबी ﷺ ने नज़र लगने पर रुक़्या (दम) करने का हुक्म दिया। (सहीह बुख़ारी: 5738)

सूरह फ़लक़ और सूरह नास

नबी ﷺ जिन्नात और इंसानों की नज़र से पनाह माँगा करते थे, यहाँ तक कि सूरह फ़लक़ और सूरह नास नाज़िल हुईं। फिर आपने इन्हें पढ़ना शुरू किया और बाक़ी को छोड़ दिया। (तिर्मिज़ी: 2058) इसलिए नज़र की सबसे बड़ी दुआ ये दोनों सूरतें हैं।

सूरह क़लम की आयत (व इंय यकाद)

बहुत से लोग नज़र के लिए सूरह क़लम की आख़िरी दो आयतें भी पढ़ते हैं, क्योंकि इनमें काफ़िरों की बुरी नज़र का ज़िक्र है:

وَإِنْ يَّكَادُ الَّذِيْنَ كَفَرُوْا لَيُزْلِقُوْنَكَ بِأَبْصَارِهِمْ لَمَّا سَمِعُوا الذِّكْرَ وَيَقُوْلُوْنَ إِنَّهٗ لَمَجْنُوْنٌ، وَمَا هُوَ إِلَّا ذِكْرٌ لِّلْعٰلَمِيْنَ

हिंदी: व इंय यकादुल्लज़ीना कफ़रू ल-युज़लिक़ूनका बि-अबसारिहिम लम्मा समिउज़ ज़िक्रा व यक़ूलूना इन्नहू ल-मजनून, व मा हुवा इल्ला ज़िक्रुल लिल आलमीन (सूरह क़लम 68:51-52)

बच्चों की नज़र कैसे उतारें? (सुन्नत तरीका)

  1. वुज़ू करके बच्चे के पास बैठें।
  2. एक बार सूरह फ़ातिहा और आयतुल कुर्सी पढ़ें।
  3. सूरह इख़लास, सूरह फ़लक़ और सूरह नास तीन-तीन बार पढ़ें।
  4. “उईज़ुका (लड़की के लिए उईज़ुकि) बि कलिमातिल्लाहित ताम्मति…” पढ़ें।
  5. “बिस्मिल्लाहि अरक़ीक…” वाली दुआ पढ़ें।
  6. बच्चे पर हल्का सा दम करें (फूँकें) और उसके सिर और जिस्म पर हाथ फेरें।
  7. रोज़ सुबह-शाम और सोते वक़्त ये अमल दोहराएँ।

अगर मालूम हो कि नज़र किसकी लगी है, तो हदीस के मुताबिक़ उस शख़्स से वुज़ू करवाकर वो पानी नज़र लगे शख़्स पर डाला जाता है। (इब्न माजा: 3509)

नज़र के बारे में ज़रूरी बातें

  • हर बीमारी या परेशानी को नज़र न समझें। बीमारी हो तो डॉक्टर को ज़रूर दिखाएँ, और साथ में दुआ और दम भी करें। इलाज करना भी सुन्नत है।
  • नींबू-मिर्च लटकाने जैसे टोटकों की कोई बुनियाद क़ुरआन और हदीस में नहीं है। हिफ़ाज़त के लिए ऊपर दी गई मसनून दुआओं पर भरोसा करें।
  • अपनी नेमतों का बेवजह दिखावा न करें, और दूसरों की चीज़ देखकर हसद करने की बजाय “माशाअल्लाह” कहें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या इस्लाम में नज़र लगना सच है?

हाँ, नबी ﷺ ने फ़रमाया: “नज़र का लगना हक़ है।” (बुख़ारी: 5740, मुस्लिम: 2187)

नज़र से बचने की सबसे अच्छी दुआ कौन सी है?

“अऊज़ु बि कलिमातिल्लाहित ताम्मति मिन कुल्लि शैतानिंव व हाम्मतिंव व मिन कुल्लि ऐनिल लाम्मह” (बुख़ारी: 3371) और सूरह फ़लक़ व सूरह नास।

नज़र उतारने की दुआ कौन सी है?

“बिस्मिल्लाहि अरक़ीक, मिन कुल्लि शैइंय युअज़ीक…” ये दुआ हज़रत जिब्रील (अलैहिस्सलाम) ने नबी ﷺ पर पढ़ी थी (मुस्लिम: 2186)।

छोटे बच्चों की नज़र कैसे उतारें?

फ़ातिहा, आयतुल कुर्सी, तीनों क़ुल और “उईज़ुका बि कलिमातिल्लाहित ताम्मह…” पढ़कर बच्चे पर दम करें और हाथ फेरें।

किसी की तारीफ़ करते वक़्त क्या कहें ताकि नज़र न लगे?

“माशाअल्लाह ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह” या “बारकल्लाहु फ़ीह” कहें, यानी बरकत की दुआ दें।

क्या अपने आप को भी नज़र लग सकती है?

हाँ, अपनी चीज़ पर ग़ुरूर से देखने से भी नज़र लग सकती है। इसलिए अपनी अच्छी चीज़ देखकर भी “माशाअल्लाह” कहें।

आख़िरी बात

नज़र से बचने का सबसे आसान तरीका है रोज़ सुबह-शाम मसनून दुआएँ और तीनों क़ुल पढ़ना, और दूसरों की अच्छी चीज़ देखकर बरकत की दुआ देना। अपने बच्चों पर रोज़ दम करें और उन्हें भी ये दुआएँ सिखाएँ।

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