Teesre Ashre Ki Dua: रमज़ान के तीसरे (आख़िरी) अशरे यानी 21 से 29/30 रमज़ान तक आम तौर पर ये दुआ पढ़ी जाती है: “अल्लाहुम्मा अजिरनी मिनन नार”, यानी ऐ अल्लाह! मुझे जहन्नम की आग से बचा ले। इसी अशरे में शब-ए-क़द्र भी है, जिसकी मसनून दुआ है: “अल्लाहुम्मा इन्नका अफ़ुव्वुन तुहिब्बुल अफ़्वा फ़अ्फ़ु अन्नी” (तिर्मिज़ी: 3513)।
इस पोस्ट में तीसरे अशरे की दुआ अरबी, हिंदी, इंग्लिश और तर्जुमे के साथ है। साथ में शब-ए-क़द्र की दुआ, एतिकाफ़, और आख़िरी अशरे में नबी ﷺ की इबादत का तरीका भी बताया गया है।
रमज़ान के तीनों अशरे और उनकी दुआ
| अशरा | नाम | आम तौर पर पढ़ी जाने वाली दुआ |
|---|---|---|
| पहला अशरा (1-10) | रहमत | रब्बिग़फ़िर वरहम व अन्ता ख़ैरुर राहिमीन |
| दूसरा अशरा (11-20) | मग़फ़िरत | अस्तग़फ़िरुल्लाहा रब्बी मिन कुल्लि ज़म्बिंव व अतूबु इलैह |
| तीसरा अशरा (21-30) | जहन्नम से निजात | अल्लाहुम्मा अजिरनी मिनन नार |
पहले और दूसरे अशरे की दुआ: पहले अशरे की दुआ | दूसरे अशरे की दुआ

Teesre Ashre Ki Dua in Arabic
اَللّٰهُمَّ أَجِرْنِيْ مِنَ النَّارِ
Teesre Ashre Ki Dua in Hindi
अल्लाहुम्मा अजिरनी मिनन नार
Teesre Ashre Ki Dua in English
Allahumma ajirni minan naar
तर्जुमा
ऐ अल्लाह! मुझे (जहन्नम की) आग से पनाह दे। इस दुआ के मतलब पर तफ़सील से: अल्लाहुम्मा अजिरनी मिनन नार का मतलब
ज़रूरी बात: रमज़ान को रहमत, मग़फ़िरत और निजात के तीन हिस्सों में बाँटने वाली रिवायत (इब्न ख़ुज़ैमा: 1887) की सनद को मुहद्दिसीन ने कमज़ोर बताया है। ये दुआएँ अपने मतलब के लिहाज़ से बेहतरीन हैं और पढ़ी जा सकती हैं, लेकिन इन्हें किसी ख़ास अशरे के लिए “फ़र्ज़” या “सुन्नत” न समझें। सबसे ज़्यादा ज़ोर उस दुआ पर दें जो नबी ﷺ ने ख़ुद सिखाई (नीचे)।
शब-ए-क़द्र की मसनून दुआ (सबसे अहम)
हज़रत आइशा (रज़ि.) ने पूछा: या रसूलल्लाह! अगर मुझे शब-ए-क़द्र मिल जाए तो क्या पढ़ूँ? आप ﷺ ने फ़रमाया ये पढ़ो: (तिर्मिज़ी: 3513)
اَللّٰهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّيْ
हिंदी: अल्लाहुम्मा इन्नका अफ़ुव्वुन तुहिब्बुल अफ़्वा फ़अ्फ़ु अन्नी
तर्जुमा: ऐ अल्लाह! तू बहुत माफ़ करने वाला है, माफ़ करना तुझे पसंद है, तो मुझे माफ़ कर दे। शब-ए-क़द्र की दुआ (पूरी जानकारी)
आख़िरी अशरे में नबी ﷺ क्या करते थे?
- इबादत में ज़्यादा मेहनत: जब आख़िरी अशरा आता तो नबी ﷺ कमर कस लेते, रातों को जागते और अपने घरवालों को भी जगाते। (सहीह बुख़ारी: 2024)
- एतिकाफ़: नबी ﷺ आख़िरी अशरे में मस्जिद में एतिकाफ़ करते थे। (सहीह बुख़ारी: 2026)
- शब-ए-क़द्र की तलाश: शब-ए-क़द्र को आख़िरी अशरे की ताक़ रातों (21, 23, 25, 27, 29) में तलाश करो। (सहीह बुख़ारी: 2017)
तीसरे अशरे में क्या करें? (आसान चेकलिस्ट)
- हर ताक़ रात में कुछ देर जागकर नफ़्ल, तिलावत और दुआ करें।
- “अल्लाहुम्मा इन्नका अफ़ुव्वुन…” को ज़्यादा से ज़्यादा पढ़ें।
- “अल्लाहुम्मा अजिरनी मिनन नार” पढ़ते रहें।
- हो सके तो एतिकाफ़ करें, या कम से कम कुछ घंटे मस्जिद में गुज़ारें।
- ईद से पहले सदक़ा-ए-फ़ित्र अदा कर दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
तीसरे अशरे की दुआ कौन सी है?
आम तौर पर “अल्लाहुम्मा अजिरनी मिनन नार” (ऐ अल्लाह मुझे जहन्नम से बचा) पढ़ी जाती है।
तीसरा अशरा कब से शुरू होता है?
21 रमज़ान से (यानी 20वें रोज़े की शाम मग़रिब के बाद से) ईद का चाँद दिखने तक।
शब-ए-क़द्र की दुआ कौन सी है?
“अल्लाहुम्मा इन्नका अफ़ुव्वुन तुहिब्बुल अफ़्वा फ़अ्फ़ु अन्नी” (तिर्मिज़ी: 3513)।
क्या तीनों अशरों की दुआएँ हदीस से साबित हैं?
अशरों के बँटवारे वाली रिवायत कमज़ोर है, लेकिन दुआओं का मतलब सही है, इसलिए पढ़ सकते हैं।
एतिकाफ़ कब से कब तक होता है?
20 रमज़ान की शाम (मग़रिब से पहले) मस्जिद में दाख़िल होकर ईद का चाँद दिखने तक।
रमज़ान 2027 का तीसरा अशरा कब होगा?
अगर रमज़ान 8-9 फ़रवरी 2027 से शुरू हो, तो तीसरा अशरा लगभग 28 फ़रवरी से 9-10 मार्च 2027 तक होगा।
आख़िरी बात
तीसरा अशरा रमज़ान का सबसे क़ीमती हिस्सा है, क्योंकि इसमें शब-ए-क़द्र छुपी है जो हज़ार महीनों से बेहतर है। इन दस रातों में “अल्लाहुम्मा इन्नका अफ़ुव्वुन…” और “अल्लाहुम्मा अजिरनी मिनन नार” को अपनी ज़बान पर रखें।
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