Pehla Kalma Tayyab in Hindi: पहला कलमा कलमा तय्यब अरबी, हिंदी और तर्जुमा

Pehla Kalma Tayyab in Hindi: इस्लाम का पहला कलमा कलमा तय्यब (पाक कलमा) है: “ला इलाहा इल्लल्लाहु मुहम्मदुर रसूलुल्लाह…”। यहाँ पहला कलमा अरबी, हिंदी, इंग्लिश और आसान तर्जुमे के साथ दिया गया है, साथ में इसका मतलब, फ़ज़ीलत और याद करने का तरीका भी।

बातजानकारी
कलमे का नामकलमा तय्यब
मतलबपाक कलमा
क्रमछह कलमों में पहला
सभी कलमे6 कलमे हिंदी में
pehla kalma tayyab in hindi

Pehla Kalma Tayyab in Arabic

لَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ مُحَمَّدٌ رَّسُوْلُ اللّٰهِ

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Pehla Kalma Tayyab in Hindi

ला इलाहा इल्लल्लाहु मुहम्मदुर रसूलुल्लाह

Pehla Kalma Tayyab in English

La ilaha illallahu Muhammadur Rasoolullah

पहला कलमा का तर्जुमा

अल्लाह के सिवा कोई माबूद (इबादत के लायक़) नहीं, मुहम्मद ﷺ अल्लाह के रसूल हैं।

कलमा तय्यब का मतलब और अहमियत

पहला कलमा इस्लाम की बुनियाद है। इसके दो हिस्से हैं: पहला हिस्सा “ला इलाहा इल्लल्लाह” (तौहीद, यानी अल्लाह एक है) और दूसरा हिस्सा “मुहम्मदुर रसूलुल्लाह” (रिसालत, यानी नबी ﷺ अल्लाह के रसूल हैं)। इन दोनों पर दिल से ईमान लाकर ज़बान से कहने वाला मुसलमान कहलाता है।

पहला कलमा की फ़ज़ीलत

  • रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया कि सबसे अफ़ज़ल ज़िक्र “ला इलाहा इल्लल्लाह” है। (तिर्मिज़ी: 3383)
  • जो सच्चे दिल से गवाही दे कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और मुहम्मद ﷺ अल्लाह के रसूल हैं, अल्लाह उस पर जहन्नम हराम कर देता है। (सहीह बुख़ारी: 128)
  • जिसकी आख़िरी बात “ला इलाहा इल्लल्लाह” हो, वो जन्नत में दाख़िल होगा। (अबू दाऊद: 3116)

बच्चों को याद कराने का आसान तरीका

  1. कलमे को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटें और रोज़ एक हिस्सा याद कराएँ।
  2. पहले आसान ज़बान में मतलब समझाएँ, फिर अल्फ़ाज़ रटवाएँ।
  3. सोने से पहले और सुबह उठकर बच्चे के साथ दोहराएँ।
  4. सही उच्चारण किसी क़ारी या इमाम साहब से सुनवा लें, क्योंकि हिंदी में अरबी के कुछ हर्फ़ ठीक से नहीं लिखे जा सकते।

बाक़ी कलमे

छहों कलमे एक साथ: 6 कलमे हिंदी में (अरबी और तर्जुमा के साथ)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

पहला कलमा कौन सा है?

पहला कलमा “कलमा तय्यब” है, जिसका मतलब है “पाक कलमा”।

पहला कलमा हिंदी में क्या है?

ला इलाहा इल्लल्लाहु मुहम्मदुर रसूलुल्लाह।

पहला कलमा का तर्जुमा क्या है?

अल्लाह के सिवा कोई माबूद (इबादत के लायक़) नहीं, मुहम्मद ﷺ अल्लाह के रसूल हैं।

क्या कलमे याद करना फ़र्ज़ है?

छहों कलमे ज़बानी याद करना फ़र्ज़ नहीं, लेकिन इनमें बताए गए ईमान के अक़ीदे पर यक़ीन रखना ज़रूरी है। इन्हें याद करना और पढ़ना बहुत सवाब का काम है।

क्या छह कलमे हदीस में एक साथ आए हैं?

छह कलमों का ये सेट हदीस में इसी तरतीब से नहीं आया; उलमा ने बच्चों को आसानी से सिखाने के लिए इन्हें जमा किया है। लेकिन इनके अल्फ़ाज़ ज़्यादातर क़ुरआन और हदीस से लिए गए हैं।

कलमा बिना वुज़ू पढ़ सकते हैं?

हाँ, कलमे और ज़िक्र के लिए वुज़ू शर्त नहीं है।

आख़िरी बात

पहला कलमा कलमा तय्यब को मतलब समझकर पढ़ें और अपने बच्चों को भी सिखाएँ। ये सिर्फ़ याद करने के अल्फ़ाज़ नहीं, बल्कि हमारे ईमान का एलान है।

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