Ghusl Ki Dua: सीधा जवाब: ग़ुस्ल के लिए कोई ख़ास दुआ सहीह हदीस में नहीं है। ग़ुस्ल शुरू करते वक़्त (बाथरूम में दाख़िल होने से पहले) “बिस्मिल्लाह” कहें, दिल में पाकी की नियत करें, और ग़ुस्ल के बाद चाहें तो वुज़ू के बाद वाली दुआ पढ़ लें।
बहुत से लोग “ग़ुस्ल की दुआ” सर्च करते हैं, इसलिए इस पोस्ट में सही जानकारी दी गई है: ग़ुस्ल से पहले और बाद में क्या पढ़ें, ग़ुस्ल की नियत, नबी ﷺ का ग़ुस्ल का तरीका, और ग़ुस्ल के फ़र्ज़।
ग़ुस्ल में क्या पढ़ें: एक नज़र में
| मौक़ा | क्या पढ़ें |
|---|---|
| ग़ुस्ल से पहले | “बिस्मिल्लाह” (बाथरूम में दाख़िल होने से पहले) |
| नियत | दिल में पाकी हासिल करने का इरादा |
| बाथरूम में दाख़िल होते वक़्त | बैतुल ख़ला की दुआ (अगर टॉयलेट साथ में है) |
| ग़ुस्ल के बाद | वुज़ू के बाद वाली दुआ (कलिमा-ए-शहादत) |

ग़ुस्ल की नियत
नियत दिल के इरादे का नाम है। दिल में ये इरादा काफ़ी है कि “मैं नापाकी दूर करने और पाक होने के लिए ग़ुस्ल कर रहा/रही हूँ”। ज़बान से कहना चाहें तो: “मैं नियत करता/करती हूँ ग़ुस्ल की, नापाकी दूर करने और अल्लाह की रज़ा के लिए।”
ग़ुस्ल के बाद की दुआ
ग़ुस्ल में वुज़ू भी शामिल होता है, इसलिए उलमा कहते हैं कि ग़ुस्ल के बाद (बाथरूम से बाहर आकर) वुज़ू के बाद की दुआ पढ़ सकते हैं। इसकी फ़ज़ीलत ये है कि जन्नत के आठों दरवाज़े खोल दिए जाते हैं। (सहीह मुस्लिम: 234)
أَشْهَدُ أَنْ لَّا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ وَحْدَهٗ لَا شَرِيْكَ لَهٗ، وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهٗ وَرَسُوْلُهٗ
हिंदी: अशहदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु वह्दहू ला शरी-क लहू, व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू
तर्जुमा: मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वो अकेला है उसका कोई शरीक नहीं, और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद ﷺ उसके बंदे और रसूल हैं। पूरी दुआ: वुज़ू के बाद की दुआ
ज़रूरी बात: जिस बाथरूम में टॉयलेट भी हो, उसके अंदर अल्लाह का ज़िक्र और दुआ नहीं पढ़नी चाहिए। इसलिए “बिस्मिल्लाह” बाथरूम में दाख़िल होने से पहले कहें, और ग़ुस्ल के बाद की दुआ बाहर आकर पढ़ें।
नबी ﷺ के ग़ुस्ल का तरीका
हज़रत आइशा (रज़ि.) ने नबी ﷺ के ग़ुस्ल का तरीका यूँ बताया है: (सहीह बुख़ारी: 248)
- पहले दोनों हाथ धोएँ।
- शर्मगाह (प्राइवेट पार्ट) और जिस्म पर लगी नापाकी धोएँ।
- नमाज़ जैसा पूरा वुज़ू करें।
- सिर पर तीन बार पानी डालें और उंगलियों से बालों की जड़ों तक पानी पहुँचाएँ।
- फिर पूरे जिस्म पर पानी बहाएँ, पहले दाईं तरफ़, फिर बाईं तरफ़।
- ध्यान रखें कि जिस्म का कोई हिस्सा (नाभि, कान के पीछे, बालों की जड़ें) सूखा न रहे।
पूरा तरीका: ग़ुस्ल का तरीका
ग़ुस्ल के 3 फ़र्ज़ (हनफ़ी)
| क्रम | फ़र्ज़ |
|---|---|
| 1 | कुल्ली करना (मुँह में अच्छी तरह पानी पहुँचाना) |
| 2 | नाक में नरम हड्डी तक पानी पहुँचाना |
| 3 | पूरे जिस्म पर इस तरह पानी बहाना कि बाल बराबर जगह भी सूखी न रहे |
इनमें से एक भी छूट जाए तो ग़ुस्ल नहीं होगा। तफ़सील: ग़ुस्ल के फ़राइज़ | ग़ुस्ल की सुन्नतें
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
क्या ग़ुस्ल की कोई ख़ास दुआ है?
नहीं, सहीह हदीस में ग़ुस्ल के लिए कोई ख़ास दुआ नहीं है। शुरू में “बिस्मिल्लाह” और दिल में नियत काफ़ी है।
ग़ुस्ल के बाद कौन सी दुआ पढ़ें?
ग़ुस्ल में वुज़ू शामिल है, इसलिए वुज़ू के बाद वाली दुआ (कलिमा-ए-शहादत) पढ़ सकते हैं, बाथरूम से बाहर आकर।
क्या ग़ुस्ल की नियत ज़बान से करना ज़रूरी है?
नहीं, दिल का इरादा काफ़ी है। ज़बान से कहना ज़रूरी नहीं।
ग़ुस्ल में कितने फ़र्ज़ हैं?
हनफ़ी मसलक में 3: कुल्ली, नाक में पानी डालना, और पूरे जिस्म पर पानी बहाना।
क्या बाथरूम के अंदर बिस्मिल्लाह पढ़ सकते हैं?
अगर बाथरूम में टॉयलेट भी है तो अंदर ज़िक्र न करें, दाख़िल होने से पहले बिस्मिल्लाह कह लें।
ग़ुस्ल कब फ़र्ज़ होता है?
तफ़सील यहाँ पढ़ें: ग़ुस्ल किन चीज़ों से फ़र्ज़ होता है
आख़िरी बात
ग़ुस्ल के लिए कोई ख़ास दुआ याद करने की ज़रूरत नहीं, असल चीज़ सही तरीका और तीनों फ़र्ज़ का पूरा होना है। बिस्मिल्लाह से शुरू करें, नबी ﷺ के तरीके से ग़ुस्ल करें, और बाहर आकर कलिमा-ए-शहादत पढ़ें।
ये भी पढ़ें: ग़ुस्ल का तरीका | ग़ुस्ल के फ़राइज़ | वुज़ू का तरीका | तयम्मुम का तरीका
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