13 Rajab 2026: Hazrat Ali (R.A.) Ki Wiladat, Fazail aur Mubarakbad

13 Rajab 2026: इस्लामी तारीख़ 13 रजब को अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली बिन अबी तालिब (रज़ियल्लाहु अन्हु) की विलादत (पैदाइश) का दिन माना जाता है। इस साल 13 रजब 1448 अंदाज़न 23-24 दिसंबर 2026 को होगी (रजब का चाँद दिखने पर तय होगी)।

इस पोस्ट में हज़रत अली (रज़ि.) का मुख़्तसर तआरुफ़, उनके लक़ब, सहीह हदीसों में आए उनके फ़ज़ाइल, और 13 रजब की मुबारकबाद के पैग़ाम दिए गए हैं।

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हज़रत अली (रज़ि.) एक नज़र में

बातजानकारी
पूरा नामअली बिन अबी तालिब
विलादत13 रजब, आमुल फ़ील के लगभग 30 साल बाद (मक्का)
रिश्तानबी ﷺ के चचाज़ाद भाई और दामाद (हज़रत फ़ातिमा के शौहर)
औलादहज़रत हसन, हज़रत हुसैन, हज़रत ज़ैनब, हज़रत उम्मे कुलसूम (रज़ि.)
ख़िलाफ़तचौथे ख़लीफ़ा-ए-राशिद (35-40 हिजरी)
मशहूर लक़बअसदुल्लाह, हैदर-ए-कर्रार, अबू तुराब, मुर्तज़ा
शहादत21 रमज़ान 40 हिजरी, कूफ़ा
13 rajab hazrat ali wiladat

हज़रत अली (रज़ि.) की विलादत

बहुत से मुअर्रिख़ीन (इतिहासकारों) के मुताबिक़ हज़रत अली (रज़ि.) की पैदाइश 13 रजब को मक्का में, ख़ाना-ए-काबा के अंदर हुई। उनके वालिद हज़रत अबू तालिब नबी ﷺ के चचा थे, जिन्होंने नबी ﷺ की परवरिश की थी। बचपन से ही हज़रत अली (रज़ि.) नबी ﷺ के घर में पले, और बच्चों में सबसे पहले इस्लाम क़बूल करने वाले वही थे।

सहीह हदीसों में हज़रत अली (रज़ि.) के फ़ज़ाइल

  • हारून और मूसा जैसा रिश्ता: नबी ﷺ ने फ़रमाया: “क्या तुम इस पर राज़ी नहीं कि तुम मेरे लिए वैसे हो जैसे हारून मूसा के लिए थे, बस मेरे बाद कोई नबी नहीं।” (सहीह बुख़ारी: 3706, सहीह मुस्लिम: 2404)
  • ख़ैबर का झंडा: नबी ﷺ ने फ़रमाया: “कल मैं झंडा उस शख़्स को दूँगा जिसके हाथ पर अल्लाह फ़तह देगा, वो अल्लाह और उसके रसूल से मोहब्बत करता है और अल्लाह और उसका रसूल उससे मोहब्बत करते हैं।” फिर झंडा हज़रत अली (रज़ि.) को दिया। (सहीह बुख़ारी: 3701)
  • मौला: “जिसका मैं मौला, उसका अली मौला।” (तिर्मिज़ी: 3713)
  • ईमान की निशानी: हज़रत अली (रज़ि.) फ़रमाते हैं कि नबी ﷺ ने मुझसे वादा किया कि मुझसे मोहब्बत सिर्फ़ मोमिन करेगा और मुझसे बुग़्ज़ सिर्फ़ मुनाफ़िक़ रखेगा। (सहीह मुस्लिम: 78)
  • “अबू तुराब” का लक़ब: एक बार हज़रत अली (रज़ि.) मस्जिद में ज़मीन पर सो गए और जिस्म पर मिट्टी लग गई, तो नबी ﷺ ने प्यार से फ़रमाया: “उठो अबू तुराब (मिट्टी वाले)!” ये लक़ब उन्हें सबसे प्यारा था। (सहीह बुख़ारी: 441)

हज़रत अली (रज़ि.) के मशहूर लक़ब और उनके मतलब

लक़बमतलब
असदुल्लाहअल्लाह का शेर
हैदर-ए-कर्रारबार-बार हमला करने वाला बहादुर
अबू तुराबमिट्टी वाले (नबी ﷺ का दिया हुआ लक़ब)
मुर्तज़ापसंदीदा, चुना हुआ
बाबुल इल्मइल्म का दरवाज़ा

13 रजब मुबारक: पैग़ाम और विशेज़

  • 13 रजब की बहुत-बहुत मुबारकबाद! अल्लाह हमें हज़रत अली (रज़ि.) की बहादुरी, इल्म और सादगी से कुछ हिस्सा अता फ़रमाए।
  • जिसके दिल में अली की मोहब्बत है, उसके ईमान में रोशनी है। 13 रजब मुबारक!
  • शेर-ए-ख़ुदा, हैदर-ए-कर्रार हज़रत अली (रज़ि.) की विलादत की आप सबको दिली मुबारकबाद।
  • इल्म का दरवाज़ा, बहादुरी की मिसाल, सादगी की तस्वीर: हज़रत अली (रज़ि.)। 13 रजब मुबारक हो!
  • अल्लाह हमें अहले बैत की सच्ची मोहब्बत और सहाबा के नक़्शे-क़दम पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन। 13 रजब मुबारक।
  • आज के दिन दुआ है कि हमारे घरों में भी वही सादगी और ईमानदारी हो जो हज़रत अली (रज़ि.) के घर में थी।

इस दिन क्या करें?

  • हज़रत अली (रज़ि.) की सीरत (जीवनी) पढ़ें और बच्चों को उनकी बहादुरी और इंसाफ़ के वाक़िआत सुनाएँ।
  • दुरूद शरीफ़ पढ़ें। दुरूद शरीफ़
  • ग़रीबों की मदद और सदक़ा करें, क्योंकि सख़ावत हज़रत अली (रज़ि.) की पहचान थी।
  • किसी भी जश्न में फ़िज़ूलख़र्ची और ग़ैर-शरई कामों से बचें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

13 रजब 2026 कब है?

अंदाज़न 23-24 दिसंबर 2026 को, रजब का चाँद दिखने पर सही तारीख़ तय होगी।

हज़रत अली (रज़ि.) कहाँ पैदा हुए?

बहुत से मुअर्रिख़ीन के मुताबिक़ मक्का में ख़ाना-ए-काबा के अंदर।

हज़रत अली (रज़ि.) को अबू तुराब क्यों कहते हैं?

नबी ﷺ ने उन्हें मिट्टी में लेटे देखकर प्यार से “अबू तुराब” कहा था (बुख़ारी: 441)।

हज़रत अली (रज़ि.) कितने नंबर के ख़लीफ़ा थे?

चौथे ख़लीफ़ा-ए-राशिद।

हज़रत अली (रज़ि.) की शहादत कब हुई?

19 रमज़ान 40 हिजरी को कूफ़ा की मस्जिद में फ़ज्र के वक़्त उन पर हमला हुआ, और 21 रमज़ान को उनकी शहादत हुई।

13 रजब की मुबारकबाद कैसे दें?

“13 रजब मुबारक” कहकर हज़रत अली (रज़ि.) की सीरत से जुड़ा कोई अच्छा पैग़ाम भेज सकते हैं। ऊपर कुछ पैग़ाम दिए गए हैं।

आख़िरी बात

हज़रत अली (रज़ि.) की ज़िंदगी बहादुरी, इल्म, इंसाफ़ और सादगी का नमूना है। 13 रजब पर उनसे मोहब्बत का सबसे अच्छा इज़हार यही है कि हम उनकी सीरत पढ़ें और उस पर अमल करने की कोशिश करें।

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