Attahiyat in Hindi: अत्तहिय्यात (तशह्हुद) वो दुआ है जो हर नमाज़ में क़ादे (बैठने) में पढ़ी जाती है: “अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस्सलवातु वत्तय्यिबातु…”। ये अल्फ़ाज़ नबी ﷺ ने हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ि.) को उसी एहतिमाम से सिखाए जैसे क़ुरआन की सूरत सिखाई जाती है। (सहीह बुख़ारी: 831, 6265)
इस पोस्ट में अत्तहिय्यात अरबी, हिंदी, इंग्लिश और तर्जुमे के साथ है। साथ ही नमाज़ में कब पढ़ें, उंगली कब उठाएँ, और अत्तहिय्यात से जुड़ी आम ग़लतियाँ भी बताई गई हैं।
Attahiyat in Arabic
اَلتَّحِيَّاتُ لِلّٰهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ، اَلسَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللّٰهِ وَبَرَكَاتُهٗ، اَلسَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلٰى عِبَادِ اللّٰهِ الصّٰلِحِيْنَ، أَشْهَدُ أَنْ لَّا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهٗ وَرَسُوْلُهٗ

Attahiyat in Hindi
अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस्सलवातु वत्तय्यिबातु, अस्सलामु अलैका अय्युहन नबिय्यु व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू, अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस सालिहीन, अशहदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू।
Attahiyat in English
Attahiyyatu lillahi wassalawatu wattayyibatu, assalamu ‘alaika ayyuhan nabiyyu wa rahmatullahi wa barakatuhu, assalamu ‘alaina wa ‘ala ‘ibadillahis saliheen, ash-hadu alla ilaha illallahu wa ash-hadu anna Muhammadan ‘abduhu wa rasooluhu.
अत्तहिय्यात का तर्जुमा
तमाम ज़बानी, बदनी और माली इबादतें अल्लाह ही के लिए हैं। ऐ नबी! आप पर सलाम हो और अल्लाह की रहमत और उसकी बरकतें। सलाम हो हम पर और अल्लाह के नेक बंदों पर। मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद ﷺ उसके बंदे और रसूल हैं।
नबी ﷺ ने फ़रमाया कि जब तुम “अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस सालिहीन” कहते हो, तो ये सलाम आसमान और ज़मीन के हर नेक बंदे तक पहुँच जाता है। (सहीह बुख़ारी: 831)
नमाज़ में अत्तहिय्यात कब पढ़ें?
| मौक़ा | क्या पढ़ें |
|---|---|
| 2 रकात वाली नमाज़ | दूसरी रकात के बाद आख़िरी क़ादे में: अत्तहिय्यात, फिर दुरूद, फिर दुआ, फिर सलाम |
| 3 या 4 रकात वाली नमाज़ (पहला क़ादा) | दूसरी रकात के बाद सिर्फ़ अत्तहिय्यात पढ़कर खड़े हो जाएँ |
| 3 या 4 रकात वाली नमाज़ (आख़िरी क़ादा) | अत्तहिय्यात, फिर दुरूद-ए-इब्राहीम, फिर दुआ-ए-मासूरा, फिर सलाम |
अत्तहिय्यात में उंगली कब उठाएँ?
नबी ﷺ तशह्हुद में बैठते तो दाएँ हाथ की शहादत की उंगली से इशारा करते थे। (सहीह मुस्लिम: 580) हनफ़ी तरीके में “अशहदु अल्ला इलाहा” पर उंगली उठाई जाती है और “इल्लल्लाह” पर नीचे कर दी जाती है। इसके लिए बीच की उंगली और अँगूठे से हल्क़ा (गोला) बनाया जाता है।
अत्तहिय्यात से जुड़ी आम ग़लतियाँ
- बहुत तेज़ पढ़ना, जिससे अल्फ़ाज़ बिगड़ जाते हैं।
- पहले क़ादे में अत्तहिय्यात के बाद दुरूद भी पढ़ने लगना। पहले क़ादे में सिर्फ़ अत्तहिय्यात पढ़कर खड़े हो जाएँ।
- “अशहदु अन्ना मुहम्मदन” की जगह “अशहदु अन्ना मुहम्मदर” पढ़ना।
- उंगली पूरे वक़्त हिलाते रहना या बिल्कुल न उठाना (हनफ़ी तरीके में सिर्फ़ गवाही के वक़्त)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
अत्तहिय्यात नमाज़ में कब पढ़ी जाती है?
हर दो रकात के बाद क़ादे में, और आख़िरी क़ादे में भी।
अत्तहिय्यात पढ़ना फ़र्ज़ है या वाजिब?
हनफ़ी मसलक में दोनों क़ादों में अत्तहिय्यात पढ़ना वाजिब है।
अगर अत्तहिय्यात पढ़ना भूल जाएँ तो?
वाजिब छूटने पर सज्दा-ए-सहव करें। सज्दा-ए-सहव का तरीका
अत्तहिय्यात में उंगली कब उठाई जाती है?
हनफ़ी तरीके में “ला इलाहा” पर उठाएँ और “इल्लल्लाह” पर नीचे कर दें।
क्या अत्तहिय्यात मेराज की बातचीत है?
ये बात आम तौर पर बयान की जाती है, लेकिन इसकी कोई मज़बूत सनद (सहीह हवाला) नहीं मिलती। सहीह बात ये है कि नबी ﷺ ने इसे सहाबा को नमाज़ के लिए सिखाया।
क्या औरतें भी अत्तहिय्यात यही पढ़ेंगी?
हाँ, अत्तहिय्यात के अल्फ़ाज़ मर्द और औरत दोनों के लिए एक ही हैं।
आख़िरी बात
अत्तहिय्यात में हम दिन में कई बार अल्लाह की तारीफ़, नबी ﷺ पर सलाम और ईमान की गवाही देते हैं। इसका मतलब समझकर पढ़ेंगे तो नमाज़ में ख़ुशू (ध्यान) बढ़ेगा।
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