Islamic Quotes in Hindi: यहाँ क़ुरआन और सहीह हदीस से लिए गए 40 ख़ूबसूरत इस्लामी क़ौल (quotes) हिंदी में दिए गए हैं, सब्र, शुक्र, दुआ, नमाज़, माँ-बाप, अख़लाक़, इल्म, तौबा और ज़िंदगी पर। इंटरनेट पर बहुत से “इस्लामी quotes” बिना हवाले के घूमते हैं जिनमें कई गढ़े हुए होते हैं, इसलिए यहाँ हर क़ौल के साथ उसका पक्का हवाला दिया गया है, ताकि आप भरोसे के साथ शेयर कर सकें।

सब्र पर इस्लामी क़ौल
- “बेशक अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है।”
(सूरह बक़रह 2:153) - “बेशक हर मुश्किल के साथ आसानी है।”
(सूरह इंशिराह 94:6) - “अल्लाह किसी जान पर उसकी ताक़त से ज़्यादा बोझ नहीं डालता।”
(सूरह बक़रह 2:286) - “मोमिन का मामला भी अजीब है, उसके हर काम में भलाई है: ख़ुशी मिले तो शुक्र करता है, और तकलीफ़ पहुँचे तो सब्र करता है।”
(सहीह मुस्लिम: 2999) - “सब्र और नमाज़ से मदद माँगो।”
(सूरह बक़रह 2:45)
शुक्र पर इस्लामी क़ौल
- “अगर तुम शुक्र करोगे तो मैं तुम्हें और ज़्यादा दूँगा।”
(सूरह इब्राहीम 14:7) - “तो तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?”
(सूरह रहमान 55:13) - “जो लोगों का शुक्रिया अदा नहीं करता, वो अल्लाह का शुक्र भी अदा नहीं करता।”
(तिर्मिज़ी: 1954) - “अल्हम्दुलिल्लाह (आमाल के) तराज़ू को भर देता है।”
(सहीह मुस्लिम: 223)
दुआ और अल्लाह पर भरोसे पर क़ौल
- “मुझे पुकारो, मैं तुम्हारी दुआ क़बूल करूँगा।”
(सूरह ग़ाफ़िर 40:60) - “जब मेरे बंदे तुमसे मेरे बारे में पूछें, तो (कह दो) मैं क़रीब हूँ, पुकारने वाले की पुकार का जवाब देता हूँ।”
(सूरह बक़रह 2:186) - “जो अल्लाह पर भरोसा करे, अल्लाह उसके लिए काफ़ी है।”
(सूरह तलाक़ 65:3) - “सुन लो! अल्लाह के ज़िक्र से ही दिलों को सुकून मिलता है।”
(सूरह रअद 13:28) - “अगर तुम अल्लाह पर वैसा भरोसा करो जैसा करना चाहिए, तो वो तुम्हें परिंदों की तरह रिज़्क़ देगा, जो सुबह ख़ाली पेट निकलते हैं और शाम को भरे पेट लौटते हैं।”
(तिर्मिज़ी: 2344)
नमाज़ पर इस्लामी क़ौल
- “बेशक नमाज़ बेहयाई और बुरे कामों से रोकती है।”
(सूरह अनकबूत 29:45) - “क़यामत के दिन बंदे से सबसे पहले नमाज़ का हिसाब लिया जाएगा।”
(तिर्मिज़ी: 413) - “जिसने ईशा जमाअत से पढ़ी, गोया उसने आधी रात इबादत की, और जिसने फ़ज्र भी जमाअत से पढ़ी, गोया उसने पूरी रात इबादत की।”
(सहीह मुस्लिम: 656)
माँ-बाप पर इस्लामी क़ौल
- “माँ-बाप को “उफ़” तक न कहो, न उन्हें झिड़को, और उनसे इज़्ज़त से बात करो।”
(सूरह बनी इसराईल 17:23) - “एक शख़्स ने पूछा: मेरे अच्छे सुलूक का सबसे ज़्यादा हक़दार कौन है? फ़रमाया: तुम्हारी माँ (तीन बार), फिर तुम्हारा बाप।”
(सहीह बुख़ारी: 5971) - “अल्लाह की रज़ा बाप की रज़ा में है, और अल्लाह की नाराज़गी बाप की नाराज़गी में है।”
(तिर्मिज़ी: 1899) - “ऐ मेरे रब! इन दोनों पर रहम फ़रमा, जैसे इन्होंने बचपन में मुझे पाला।”
(सूरह बनी इसराईल 17:24)
अख़लाक़ (अच्छे व्यवहार) पर क़ौल
- “तुम में सबसे अच्छा वो है जिसके अख़लाक़ सबसे अच्छे हों।”
(सहीह बुख़ारी: 3559) - “अपने भाई से मुस्कुराकर मिलना भी सदक़ा है।”
(तिर्मिज़ी: 1956) - “पहलवान वो नहीं जो (दूसरों को) पछाड़ दे, असल पहलवान वो है जो ग़ुस्से के वक़्त ख़ुद पर क़ाबू रखे।”
(सहीह बुख़ारी: 6114) - “जो अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखता है, वो अच्छी बात कहे या चुप रहे।”
(सहीह बुख़ारी: 6018) - “तुम में से कोई (कामिल) मोमिन नहीं हो सकता जब तक अपने भाई के लिए वही पसंद न करे जो अपने लिए पसंद करता है।”
(सहीह बुख़ारी: 13) - “रहम करने वालों पर रहमान रहम करता है। तुम ज़मीन वालों पर रहम करो, आसमान वाला तुम पर रहम करेगा।”
(तिर्मिज़ी: 1924)
इल्म पर इस्लामी क़ौल
- “ऐ मेरे रब! मेरे इल्म में इज़ाफ़ा फ़रमा।”
(सूरह ताहा 20:114) - “क्या जानने वाले और न जानने वाले बराबर हो सकते हैं?”
(सूरह ज़ुमर 39:9) - “जो इल्म की तलाश में किसी रास्ते पर चले, अल्लाह उसके लिए जन्नत का रास्ता आसान कर देता है।”
(सहीह मुस्लिम: 2699) - “इल्म हासिल करना हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है।”
(इब्न माजा: 224)
तौबा और अल्लाह की रहमत पर क़ौल
- “अल्लाह की रहमत से मायूस न हो, बेशक अल्लाह सारे गुनाह माफ़ कर देता है।”
(सूरह ज़ुमर 39:53) - “हर इंसान ख़ता करता है, और बेहतरीन ख़ताकार वो हैं जो तौबा करते हैं।”
(तिर्मिज़ी: 2499) - “अल्लाह की क़सम! मैं दिन में सत्तर बार से ज़्यादा अल्लाह से इस्तिग़फ़ार और तौबा करता हूँ।”
(सहीह बुख़ारी: 6307)
ज़िंदगी, नीयत और आख़िरत पर क़ौल
- “आमाल का दारोमदार नीयतों पर है।”
(सहीह बुख़ारी: 1) - “दुनिया में ऐसे रहो जैसे कोई परदेसी या मुसाफ़िर हो।”
(सहीह बुख़ारी: 6416) - “हर जान को मौत का मज़ा चखना है।”
(सूरह आले इमरान 3:185) - “सदक़ा माल को कम नहीं करता।”
(सहीह मुस्लिम: 2588) - “ऊपर वाला (देने वाला) हाथ नीचे वाले (लेने वाले) हाथ से बेहतर है।”
(सहीह बुख़ारी: 1429)
इस्लामी क़ौल शेयर करते वक़्त ध्यान रखें
- हमेशा हवाले के साथ शेयर करें। बिना हवाले के “हदीस” के नाम पर कुछ भी आगे न बढ़ाएँ, क्योंकि नबी ﷺ के नाम से झूठी बात फैलाना बहुत बड़ा गुनाह है। (सहीह बुख़ारी: 110)
- क़ुरआन की आयत वाली इमेज को ऐसी जगह न लगाएँ जहाँ बेअदबी हो।
- “ये मैसेज 10 लोगों को भेजो वरना…” जैसे मैसेज इस्लाम का हिस्सा नहीं हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
सबसे अच्छा इस्लामी क़ौल कौन सा है?
“आमाल का दारोमदार नीयतों पर है” (बुख़ारी: 1) को इस्लाम की बुनियादी हदीसों में गिना जाता है।
सब्र पर क़ुरआन की सबसे मशहूर आयत कौन सी है?
“बेशक अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है” (सूरह बक़रह 2:153) और “बेशक हर मुश्किल के साथ आसानी है” (94:6)।
क्या इंटरनेट पर मिलने वाले सारे इस्लामी quotes सही हैं?
नहीं, बहुत से quotes बिना हवाले के या गढ़े हुए होते हैं। इसलिए हमेशा क़ुरआन या सहीह हदीस का हवाला देखें।
माँ के बारे में कौन सी हदीस है?
अच्छे सुलूक की सबसे ज़्यादा हक़दार माँ है, तीन बार माँ फिर बाप (बुख़ारी: 5971)।
ग़ुस्से पर कौन सी हदीस है?
“असल पहलवान वो है जो ग़ुस्से के वक़्त ख़ुद पर क़ाबू रखे” (बुख़ारी: 6114)।
क्या इन quotes को WhatsApp स्टेटस पर लगा सकते हैं?
हाँ, हवाले के साथ शेयर करें ताकि पढ़ने वाले को भी सही जानकारी मिले।
आख़िरी बात
इन क़ौलों को सिर्फ़ शेयर न करें, रोज़ एक क़ौल को अपनी ज़िंदगी में उतारने की कोशिश करें। ज़्यादा जानकारी के लिए पढ़ें: छोटी हदीसें हिंदी में | अल्हम्दुलिल्लाह का मतलब | इंशाअल्लाह का मतलब