Asar Ki Namaz Ki Rakat: अस्र की नमाज़ में कुल 8 रकात होती हैं: पहले 4 रकात सुन्नत ग़ैर-मुअक्कदा, फिर 4 रकात फ़र्ज़। अस्र के फ़र्ज़ के बाद कोई सुन्नत या नफ़्ल नहीं पढ़ी जाती। नीचे तरतीब, नियत, वक़्त और फ़ज़ीलत हदीस के साथ दी गई है।
Asar Ki Namaz Ki Rakat: एक नज़र में
| क्रम | रकात | क़िस्म | हुक्म |
|---|---|---|---|
| 1 | 4 | सुन्नत ग़ैर-मुअक्कदा | पढ़ें तो बड़ा सवाब, छोड़ें तो गुनाह नहीं |
| 2 | 4 | फ़र्ज़ | फ़र्ज़, जमाअत के साथ |
कुल: 8 रकात। इनमें 4 फ़र्ज़ हैं। अस्र की नमाज़ को ख़ास तौर पर पाबंदी से पढ़ने की ताकीद है।

अस्र की नमाज़ पढ़ने की तरतीब
- अस्र का वक़्त शुरू होने पर पहले 4 रकात सुन्नत एक सलाम से पढ़ें।
- फिर 4 रकात फ़र्ज़ जमाअत के साथ पढ़ें। अस्र में क़िरात आहिस्ता होती है।
- फ़र्ज़ के बाद नफ़्ल न पढ़ें, बल्कि ज़िक्र और दुआ करें।
अस्र की नमाज़ की नियत
फ़र्ज़ की नियत: “नियत की मैंने चार रकात नमाज़ फ़र्ज़, वक़्त अस्र का, वास्ते अल्लाह तआला के, (इमाम के पीछे हों तो: पीछे इस इमाम के), मुँह मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर।”
नियत असल में दिल के इरादे का नाम है। ज़बान से कहना ज़रूरी नहीं, लेकिन कह लेना बेहतर है। पूरी जानकारी: अस्र की नमाज़ की नियत
अस्र की नमाज़ का वक़्त
अस्र का वक़्त ज़ुहर का वक़्त ख़त्म होने के बाद शुरू होता है और सूरज डूबने तक रहता है। लेकिन जब सूरज पीला पड़ जाए, तब तक अस्र को टालना मकरूह है, इसलिए अस्र अव्वल वक़्त में पढ़ें। अपने शहर का सही वक़्त नमाज़ टाइम टेबल से देखें।
अस्र की नमाज़ की फ़ज़ीलत
- रहमत की दुआ: नबी ﷺ ने फ़रमाया: अल्लाह उस शख़्स पर रहम करे जो अस्र से पहले 4 रकात पढ़े। (तिर्मिज़ी: 430)
- अस्र छोड़ना बड़ा नुक़सान: जिसकी अस्र की नमाज़ छूट गई, गोया उसका घर-बार और माल सब लुट गया। (सहीह बुख़ारी: 552)
- “बीच वाली नमाज़”: क़ुरआन में नमाज़ों की, ख़ास तौर पर बीच वाली नमाज़ (सलातुल वुस्ता) की हिफ़ाज़त का हुक्म है (2:238), और हदीस में इसे अस्र की नमाज़ बताया गया है। (सहीह मुस्लिम: 627)
अस्र के बाद नफ़्ल क्यों नहीं?
नबी ﷺ ने फ़रमाया कि अस्र के बाद सूरज डूबने तक कोई (नफ़्ल) नमाज़ नहीं। (सहीह बुख़ारी: 586) इसलिए अस्र के फ़र्ज़ के बाद नफ़्ल न पढ़ें। हाँ, छूटी हुई फ़र्ज़ नमाज़ की क़ज़ा सूरज पीला होने से पहले पढ़ी जा सकती है।
5 वक़्त की नमाज़ की कुल रकात
| नमाज़ | कुल रकात |
|---|---|
| फ़ज्र | 4 |
| ज़ुहर | 12 |
| अस्र | 8 |
| मग़रिब | 7 |
| ईशा | 17 |
| जुमा (ज़ुहर की जगह) | 14 |
सुन्नत, फ़र्ज़ और नफ़्ल का पूरा चार्ट: नमाज़ की रकात चार्ट
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
अस्र की नमाज़ में कितनी रकात होती हैं?
कुल 8 रकात: पहले 4 सुन्नत ग़ैर-मुअक्कदा, फिर 4 फ़र्ज़।
अस्र की सुन्नत ज़रूरी है?
अस्र की 4 सुन्नत ग़ैर-मुअक्कदा हैं, यानी पढ़ें तो बड़ा सवाब (तिर्मिज़ी: 430), न पढ़ें तो गुनाह नहीं।
क्या अस्र के बाद नफ़्ल पढ़ सकते हैं?
नहीं, अस्र के फ़र्ज़ के बाद सूरज डूबने तक नफ़्ल पढ़ना मना है (बुख़ारी: 586)।
अस्र का वक़्त कब ख़त्म होता है?
सूरज डूबने पर। लेकिन सूरज पीला होने तक देर करना मकरूह है।
सफ़र में अस्र कितनी रकात पढ़ें?
मुसाफ़िर अस्र के 4 फ़र्ज़ की जगह 2 पढ़ेगा।
अस्र की नमाज़ छूट जाए तो?
जल्द से जल्द क़ज़ा पढ़ें और तौबा करें, क्योंकि अस्र छोड़ने पर सख़्त वईद है (बुख़ारी: 552)।
आख़िरी बात
अस्र की 8 रकात: 4 सुन्नत और 4 फ़र्ज़। दिन के आख़िरी हिस्से में कामकाज के बीच अस्र अक्सर छूट जाती है, इसलिए इसकी ख़ास ताकीद है। अव्वल वक़्त में पढ़ने की आदत डालें।
ये भी पढ़ें: अस्र की नमाज़ का तरीका | अस्र की नियत | नमाज़ की रकात चार्ट | क़ज़ा नमाज़ का तरीका
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