Mozon Par Masah: सर्दियों में बार-बार पैर धोना मुश्किल होता है, इसलिए इस्लाम ने एक आसानी दी है: अगर आपने पूरा वुज़ू करके मोज़े पहने हों, तो अगले वुज़ू में पैर धोने की जगह मोज़ों के ऊपर गीला हाथ फेर सकते हैं। इसे “मसह अलल ख़ुफ़्फ़ैन” कहते हैं, और ये नबी ﷺ से साबित है। (सहीह बुख़ारी: 206)
इस पोस्ट में मसह का सही तरीका, किन मोज़ों पर मसह जायज़ है (चमड़े, ऊनी, सूती), मसह की मुद्दत, और किन चीज़ों से मसह टूट जाता है, सब हदीस और हनफ़ी फ़िक़्ह के मुताबिक़ बताया गया है।
| बात | हुक्म |
|---|---|
| शर्त | पूरा वुज़ू करके मोज़े पहने हों |
| मुक़ीम (घर पर) के लिए मुद्दत | 1 दिन और 1 रात (24 घंटे) |
| मुसाफ़िर के लिए मुद्दत | 3 दिन और 3 रातें (72 घंटे) |
| कहाँ मसह करें | मोज़े के ऊपरी हिस्से पर, नीचे नहीं |
| हवाला | बुख़ारी: 206, मुस्लिम: 276 |

मोज़ों पर मसह की दलील
हज़रत मुग़ीरा बिन शुअबा (रज़ि.) फ़रमाते हैं कि मैं एक सफ़र में नबी ﷺ के साथ था। आप वुज़ू करने लगे तो मैं आपके मोज़े उतारने के लिए झुका। आपने फ़रमाया: “रहने दो, मैंने इन्हें पाकी (वुज़ू) की हालत में पहना था,” फिर आपने उन पर मसह किया। (सहीह बुख़ारी: 206)
हज़रत अली (रज़ि.) फ़रमाते हैं कि नबी ﷺ ने मुसाफ़िर के लिए तीन दिन-रात और मुक़ीम के लिए एक दिन-रात की मुद्दत तय की। (सहीह मुस्लिम: 276)
मोज़ों पर मसह का तरीका (स्टेप बाय स्टेप)
- वुज़ू में चेहरा, हाथ, सिर का मसह सब आम तरीके से करें।
- पैर धोने की जगह, दोनों हाथों की उंगलियाँ पानी से गीली करें।
- दाएँ हाथ की उंगलियाँ दाएँ मोज़े पर और बाएँ हाथ की उंगलियाँ बाएँ मोज़े पर पैर की उंगलियों की तरफ़ रखें।
- उंगलियों को खींचते हुए टख़ने से ऊपर पिंडली की तरफ़ ले जाएँ।
- हनफ़ी मसलक में हर पैर पर कम से कम हाथ की तीन उंगलियों के बराबर जगह पर मसह होना ज़रूरी है।
- मसह एक बार करें, तीन बार नहीं।
ऊपर क्यों, नीचे क्यों नहीं? हज़रत अली (रज़ि.) ने फ़रमाया: अगर दीन अक़्ल से होता तो मोज़े के नीचे मसह करना ऊपर से बेहतर होता, लेकिन मैंने नबी ﷺ को मोज़ों के ऊपर मसह करते देखा है। (अबू दाऊद: 162)
किन मोज़ों पर मसह जायज़ है?
| मोज़े की क़िस्म | हुक्म (हनफ़ी) |
|---|---|
| चमड़े के मोज़े (ख़ुफ़्फ़) | जायज़, इस पर सब उलमा एकमत हैं |
| मोटे ऊनी/सूती मोज़े जो चमड़े जैसे हों (बिना बाँधे टिके रहें, पानी न छनने दें, उनमें चलना मुमकिन हो) | हनफ़ी मसलक में जायज़ |
| आम पतले सूती या नायलॉन के मोज़े | हनफ़ी मसलक में जायज़ नहीं (पैर धोना ज़रूरी) |
| फटे मोज़े (पैर की तीन छोटी उंगलियों के बराबर फटे हों) | हनफ़ी मसलक में मसह नहीं होगा |
नोट: पतले आम मोज़ों पर मसह को अहले हदीस और कुछ दूसरे उलमा जायज़ कहते हैं। आप जिस मसलक पर हैं उसके मुताबिक़ अमल करें, और शक हो तो किसी आलिम से पूछ लें।
मसह कब टूट जाता है?
- जिन चीज़ों से वुज़ू टूटता है, उनसे मसह भी टूट जाता है (लेकिन तब नया वुज़ू करके फिर मसह कर सकते हैं, अगर मुद्दत बाक़ी हो)।
- मोज़ा उतार दिया या पैर का ज़्यादातर हिस्सा बाहर निकल गया।
- मसह की मुद्दत (24 या 72 घंटे) पूरी हो गई।
- ग़ुस्ल फ़र्ज़ हो गया, तब मोज़े उतारकर ग़ुस्ल करना होगा।
मुद्दत की गिनती मोज़े पहनने के बाद पहली बार वुज़ू टूटने के वक़्त से शुरू होती है (हनफ़ी)।
और पढ़ें: वुज़ू का तरीका | वुज़ू के फ़राइज़ | वुज़ू किन चीज़ों से टूटता है | तयम्मुम का तरीका
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
मोज़ों पर मसह कितने दिन तक कर सकते हैं?
घर पर रहने वाला 24 घंटे, और मुसाफ़िर 72 घंटे (मुस्लिम: 276)।
क्या आम सूती मोज़ों पर मसह हो जाता है?
हनफ़ी मसलक में नहीं; सिर्फ़ चमड़े या चमड़े जैसे मोटे मोज़ों पर जायज़ है।
मसह मोज़े के ऊपर करें या नीचे?
ऊपर, उंगलियों से पिंडली की तरफ़ (अबू दाऊद: 162)।
क्या बिना वुज़ू पहने मोज़ों पर मसह हो सकता है?
नहीं, मोज़े पूरा वुज़ू करके पहने होने चाहिए (बुख़ारी: 206)।
मसह कितनी बार करें?
सिर्फ़ एक बार।
क्या सर्दी में ठंडे पानी से वुज़ू का सवाब ज़्यादा है?
हाँ, नबी ﷺ ने मुश्किल हालात में अच्छी तरह वुज़ू करने को गुनाह मिटाने और दर्जे बुलंद करने वाला अमल बताया (मुस्लिम: 251)।
आख़िरी बात
मोज़ों पर मसह अल्लाह की दी हुई आसानी है, ख़ास तौर पर सर्दियों और सफ़र में। बस शर्तें याद रखें: वुज़ू करके पहनें, सही मोज़े हों, मुद्दत का ध्यान रखें और ऊपर की तरफ़ मसह करें।