Khana Khane Ki Dua: खाना शुरू करने से पहले “बिस्मिल्लाह” कहना सुन्नत है। नबी ﷺ ने फ़रमाया: “बिस्मिल्लाह पढ़ो, दाएँ हाथ से खाओ और अपने सामने से खाओ।” (सहीह बुख़ारी: 5376) अगर शुरू में भूल जाएँ तो याद आते ही “बिस्मिल्लाहि अव्वलहू व आख़िरहू” पढ़ें।
इस पोस्ट में खाने से पहले की दुआ, भूल जाने पर दुआ, खाने के बाद की दुआ और दावत खिलाने वाले के लिए दुआ अरबी, हिंदी और तर्जुमे के साथ दी गई है। साथ में खाने की अहम सुन्नतें भी हैं।
खाने की दुआएँ एक नज़र में
| मौक़ा | दुआ | हवाला |
|---|---|---|
| खाने से पहले | बिस्मिल्लाह | बुख़ारी: 5376 |
| शुरू में भूल जाएँ तो | बिस्मिल्लाहि अव्वलहू व आख़िरहू | अबू दाऊद: 3767 |
| खाने के बाद | अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अत्अमनी हाज़ा… | अबू दाऊद: 4023 |
| दावत देने वाले के लिए | अल्लाहुम्मा बारिक लहुम फ़ीमा रज़क़्तहुम… | मुस्लिम: 2042 |
Khana Khane Se Pehle Ki Dua
بِسْمِ اللّٰهِ

हिंदी: बिस्मिल्लाह
तर्जुमा: अल्लाह के नाम से (शुरू करता हूँ)।
बहुत से लोग “बिस्मिल्लाहि व अला बरकतिल्लाह” (अल्लाह के नाम से और अल्लाह की बरकत पर) भी पढ़ते हैं। सबसे साबित और काफ़ी लफ़्ज़ “बिस्मिल्लाह” है।
अगर बिस्मिल्लाह पढ़ना भूल जाएँ तो
بِسْمِ اللّٰهِ أَوَّلَهٗ وَآخِرَهٗ
हिंदी: बिस्मिल्लाहि अव्वलहू व आख़िरहू
तर्जुमा: अल्लाह के नाम से, इसके शुरू में भी और आख़िर में भी। (अबू दाऊद: 3767, तिर्मिज़ी: 1858)
खाना खाने के बाद की दुआ
اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذِيْ أَطْعَمَنِيْ هٰذَا وَرَزَقَنِيْهِ مِنْ غَيْرِ حَوْلٍ مِّنِّيْ وَلَا قُوَّةٍ
हिंदी: अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अत्अमनी हाज़ा व रज़क़नीहि मिन ग़ैरि हौलिम मिन्नी व ला क़ुव्वह
तर्जुमा: सब तारीफ़ अल्लाह के लिए है जिसने मुझे ये खिलाया और मेरी किसी ताक़त और क़ुव्वत के बिना मुझे ये रिज़्क़ दिया।
नबी ﷺ ने फ़रमाया कि जो खाना खाकर ये दुआ पढ़े, उसके पिछले गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं। (अबू दाऊद: 4023, तिर्मिज़ी: 3458) दूसरी दुआएँ: खाना खाने के बाद की दुआ
दावत खिलाने वाले के लिए दुआ
اَللّٰهُمَّ بَارِكْ لَهُمْ فِيْمَا رَزَقْتَهُمْ، وَاغْفِرْ لَهُمْ وَارْحَمْهُمْ
हिंदी: अल्लाहुम्मा बारिक लहुम फ़ीमा रज़क़्तहुम, वग़फ़िर लहुम वरहम्हुम
तर्जुमा: ऐ अल्लाह! जो रिज़्क़ तूने इन्हें दिया उसमें बरकत दे, इन्हें बख़्श दे और इन पर रहम फ़रमा। नबी ﷺ ने एक सहाबी के घर खाना खाकर ये दुआ दी थी। (सहीह मुस्लिम: 2042)
खाना खाने की 8 सुन्नतें
- खाने से पहले हाथ धोएँ।
- “बिस्मिल्लाह” पढ़कर शुरू करें।
- दाएँ हाथ से खाएँ और अपने सामने से खाएँ। (बुख़ारी: 5376)
- बैठकर खाएँ, और मिलकर खाएँ, इससे बरकत होती है।
- खाने में ऐब न निकालें: नबी ﷺ ने कभी खाने में ऐब नहीं निकाला, पसंद आता तो खा लेते वरना छोड़ देते। (बुख़ारी: 3563)
- पेट का एक तिहाई खाने, एक तिहाई पानी और एक तिहाई साँस के लिए रखें। (तिर्मिज़ी: 2380)
- गिरा हुआ लुक़मा उठाकर साफ़ करके खा लें और खाने के बाद उंगलियाँ चाट लें, क्योंकि पता नहीं बरकत किस हिस्से में है। (मुस्लिम: 2033)
- खाने के बाद अल्लाह का शुक्र अदा करें और हाथ धोएँ।
और पढ़ें: खाना खाने की सुन्नतें (पूरी)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
खाना खाने से पहले कौन सी दुआ पढ़ें?
“बिस्मिल्लाह”। नबी ﷺ ने खाने से पहले बिस्मिल्लाह पढ़ने का हुक्म दिया (बुख़ारी: 5376)।
अगर बिस्मिल्लाह पढ़ना भूल जाएँ तो?
याद आते ही “बिस्मिल्लाहि अव्वलहू व आख़िरहू” पढ़ें (अबू दाऊद: 3767)।
खाना खाने के बाद कौन सी दुआ पढ़ें?
“अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अत्अमनी हाज़ा व रज़क़नीहि मिन ग़ैरि हौलिम मिन्नी व ला क़ुव्वह”, इससे पिछले गुनाह माफ़ होते हैं (अबू दाऊद: 4023)।
क्या खाने की दुआ ज़ोर से पढ़नी चाहिए?
बच्चों को सिखाने के लिए ऊँची आवाज़ से पढ़ना अच्छा है, वरना धीरे भी पढ़ सकते हैं।
क्या बाएँ हाथ से खाना मना है?
हाँ, बिना मजबूरी बाएँ हाथ से खाना-पीना मना है, क्योंकि शैतान बाएँ हाथ से खाता है (मुस्लिम: 2020)।
बच्चों को खाने की दुआ कैसे सिखाएँ?
रोज़ खाने पर बच्चे के साथ ऊँची आवाज़ में बिस्मिल्लाह और खाने के बाद की दुआ पढ़ें, कुछ दिनों में याद हो जाएगी।
आख़िरी बात
खाना अल्लाह का दिया हुआ रिज़्क़ है। शुरू में बिस्मिल्लाह और आख़िर में अल्हम्दुलिल्लाह, बस इन दो आदतों से रोज़ का खाना भी इबादत बन जाता है और गुनाहों की माफ़ी का ज़रिया भी।
ये भी पढ़ें: खाने के बाद की दुआ | पानी पीने की दुआ | दूध पीने की दुआ | खाने की सुन्नतें
1 thought on “Khana Khane Ki Dua in Hindi: खाने से पहले, भूल जाने पर और बाद की दुआ”
Comments are closed.