Nikah Ki Dua: निकाह या शादी के मौक़े पर दूल्हा-दुल्हन को ये मसनून दुआ दी जाती है: “बारकल्लाहु लका व बारका अलैका व जमआ बैनकुमा फ़ी ख़ैर”, यानी अल्लाह तुम्हें बरकत दे, तुम पर बरकत नाज़िल करे और तुम दोनों को भलाई के साथ जोड़े रखे। नबी ﷺ शादी करने वाले को यही दुआ देते थे। (अबू दाऊद: 2130, तिर्मिज़ी: 1091)
इस पोस्ट में शादी की मुबारकबाद की दुआ, अच्छे जीवनसाथी के लिए क़ुरआनी दुआ, निकाह के बाद पहली मुलाक़ात की दुआ, और निकाह का सुन्नत तरीका अरबी, हिंदी और तर्जुमे के साथ दिया गया है।
निकाह की दुआएँ एक नज़र में
| मौक़ा | दुआ | हवाला |
|---|---|---|
| शादी की मुबारकबाद | बारकल्लाहु लका व बारका अलैका… | अबू दाऊद: 2130 |
| नेक जीवनसाथी और औलाद के लिए | रब्बना हब लना मिन अज़्वाजिना… | सूरह फ़ुरक़ान 25:74 |
| निकाह के बाद पहली मुलाक़ात | अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका ख़ैरहा… | अबू दाऊद: 2160 |
| रिश्ते और ज़रूरत के लिए | रब्बि इन्नी लिमा अन्ज़ल्ता इलय्या… | सूरह क़सस 28:24 |

1. शादी की मुबारकबाद की दुआ (Nikah Ki Dua in Arabic)
بَارَكَ اللّٰهُ لَكَ وَبَارَكَ عَلَيْكَ وَجَمَعَ بَيْنَكُمَا فِيْ خَيْرٍ
हिंदी: बारकल्लाहु लका व बारका अलैका व जमआ बैनकुमा फ़ी ख़ैर
English: Barakallahu laka wa baraka ‘alaika wa jama’a bainakuma fi khair
तर्जुमा: अल्लाह तुम्हें बरकत दे, तुम पर बरकत नाज़िल करे, और तुम दोनों को भलाई के साथ इकट्ठा रखे।
दुल्हन को दुआ देनी हो तो: “बारकल्लाहु लकि व बारका अलैकि…” (लकि, अलैकि) कहें। शादी में “बेटा होने” जैसी दुआ के बजाय यही मसनून दुआ देना बेहतर है। जब हज़रत अब्दुर्रहमान बिन औफ़ (रज़ि.) ने शादी की, तो नबी ﷺ ने फ़रमाया: “बारकल्लाहु लक”। (सहीह बुख़ारी: 5155)
2. नेक जीवनसाथी और औलाद की क़ुरआनी दुआ
رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيّٰتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ وَّاجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِيْنَ إِمَامًا
हिंदी: रब्बना हब लना मिन अज़्वाजिना व ज़ुर्रिय्यातिना क़ुर्रता अअ्युनिंव वज-अल्ना लिल मुत्तक़ीना इमामा (सूरह फ़ुरक़ान 25:74)
तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हमें हमारी बीवियों (जीवनसाथी) और औलाद से आँखों की ठंडक अता फ़रमा, और हमें परहेज़गारों का पेशवा बना।
ये दुआ शादी से पहले अच्छे रिश्ते के लिए भी पढ़ी जा सकती है, और शादी के बाद ख़ुशहाल घर के लिए भी।
3. निकाह के बाद पहली मुलाक़ात की दुआ
नबी ﷺ ने फ़रमाया: जब कोई शादी करे तो (पहली मुलाक़ात पर) बीवी की पेशानी (माथे) पर हाथ रखकर ये दुआ पढ़े: (अबू दाऊद: 2160, इब्न माजा: 1918)
اَللّٰهُمَّ إِنِّيْ أَسْأَلُكَ خَيْرَهَا وَخَيْرَ مَا جَبَلْتَهَا عَلَيْهِ، وَأَعُوْذُ بِكَ مِنْ شَرِّهَا وَشَرِّ مَا جَبَلْتَهَا عَلَيْهِ
हिंदी: अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका ख़ैरहा व ख़ैरा मा जबल्तहा अलैह, व अऊज़ु बिका मिन शर्रिहा व शर्रि मा जबल्तहा अलैह
तर्जुमा: ऐ अल्लाह! मैं तुझसे इसकी भलाई और उस आदत की भलाई माँगता हूँ जिस पर तूने इसे पैदा किया, और इसकी बुराई और उस आदत की बुराई से तेरी पनाह माँगता हूँ जिस पर तूने इसे पैदा किया।
मियाँ-बीवी के ख़ास ताल्लुक़ की दुआ यहाँ पढ़ें: हमबिस्तरी की दुआ
4. अच्छे रिश्ते और जल्दी शादी के लिए
शादी जल्दी होने के लिए कोई ख़ास “वज़ीफ़ा” हदीस से साबित नहीं है। लेकिन ये मसनून तरीके अपनाएँ:
- हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की दुआ पढ़ें: “रब्बि इन्नी लिमा अन्ज़ल्ता इलय्या मिन ख़ैरिन फ़क़ीर” (सूरह क़सस 28:24)। इसके बाद अल्लाह ने उन्हें घर, रोज़गार और नेक बीवी अता की।
- रिश्ता तय करने से पहले इस्तिख़ारा करें।
- रिश्ते में दीनदारी को पहली तरजीह दें: नबी ﷺ ने फ़रमाया कि औरत से चार चीज़ों की वजह से निकाह किया जाता है, माल, ख़ानदान, ख़ूबसूरती और दीन, तो दीन वाली को चुनो। (सहीह बुख़ारी: 5090)
- अपनी ज़रूरत के लिए सलातुल हाजत पढ़ सकते हैं।
निकाह का सुन्नत तरीका (संक्षेप में)
- लड़की का वली (सरपरस्त) और लड़का-लड़की दोनों की रज़ामंदी हो।
- कम से कम दो मुसलमान गवाह मौजूद हों।
- मेहर तय किया जाए, जो लड़की का हक़ है।
- ख़ुत्बा-ए-निकाह पढ़ा जाए (नबी ﷺ का ख़ुत्बतुल हाजा, अबू दाऊद: 2118)।
- ईजाब और क़ुबूल: एक तरफ़ से पेशकश और दूसरी तरफ़ से “क़ुबूल किया”।
- निकाह के बाद हाज़िरीन दूल्हा-दुल्हन को “बारकल्लाहु लकुमा…” की दुआ दें।
- अपनी हैसियत के मुताबिक़ वलीमा करें: नबी ﷺ ने फ़रमाया, वलीमा करो चाहे एक बकरी से ही क्यों न हो। (सहीह बुख़ारी: 5167)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
शादी की मुबारकबाद में कौन सी दुआ दें?
“बारकल्लाहु लका व बारका अलैका व जमआ बैनकुमा फ़ी ख़ैर” (अबू दाऊद: 2130)।
दूल्हा-दुल्हन दोनों को एक साथ दुआ कैसे दें?
“बारकल्लाहु लकुमा व बारका अलैकुमा व जमआ बैनकुमा फ़ी ख़ैर” कहें।
अच्छे जीवनसाथी के लिए कौन सी दुआ पढ़ें?
“रब्बना हब लना मिन अज़्वाजिना व ज़ुर्रिय्यातिना क़ुर्रता अअ्युन…” (सूरह फ़ुरक़ान 25:74)।
क्या जल्दी शादी के लिए कोई वज़ीफ़ा है?
कोई ख़ास वज़ीफ़ा सहीह हदीस से साबित नहीं। सूरह क़सस 28:24 की दुआ, इस्तिख़ारा और सलातुल हाजत पढ़ें, और कोशिश जारी रखें।
निकाह में कितने गवाह ज़रूरी हैं?
कम से कम दो मुसलमान आक़िल-बालिग़ गवाह।
मेहर कितना होना चाहिए?
मेहर दोनों तरफ़ की रज़ामंदी से तय होता है। हनफ़ी मसलक में कम से कम 10 दिरहम (लगभग 30.6 ग्राम चाँदी) की क़ीमत होनी चाहिए। ज़्यादा की कोई हद नहीं, लेकिन आसानी बेहतर है।
आख़िरी बात
निकाह सुन्नत है और इसकी बरकत सादगी और दुआओं में है। किसी की शादी में जाएँ तो रस्मी “मुबारक हो” के साथ नबी ﷺ की ये दुआ भी ज़रूर दें: बारकल्लाहु लका व बारका अलैका व जमआ बैनकुमा फ़ी ख़ैर।
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