Shab-e-Meraj 2027: भारत में शब-ए-मेराज 27 रजब 1448 की रात को मनाई जाएगी, जो अंदाज़न 5-6 जनवरी 2027 को होगी। सही तारीख़ रजब का चाँद दिखने के बाद तय होगी। ये वो रात है जब नबी ﷺ को मस्जिद-ए-हराम से मस्जिद-ए-अक़्सा और फिर आसमानों की सैर कराई गई, और उम्मत को पाँच वक़्त की नमाज़ का तोहफ़ा मिला।
इस पोस्ट में शब-ए-मेराज 2027 की तारीख़, मेराज का पूरा वाक़िया सहीह हदीस के हवाले से, मेराज में मिले तोहफ़े, और इस रात क्या करना चाहिए, सब बताया गया है।
शब-ए-मेराज 2027 एक नज़र में
| इस्लामी तारीख़ | 27 रजब 1448 हिजरी |
| अंदाज़न तारीख़ (भारत) | 5-6 जनवरी 2027 (चाँद पर निर्भर) |
| रजब का चाँद | लगभग 10-11 दिसंबर 2026 |
| क़ुरआन में ज़िक्र | सूरह बनी इसराईल 17:1, सूरह नज्म 53:13-18 |
| सबसे बड़ा तोहफ़ा | पाँच वक़्त की नमाज़ |

इसरा और मेराज क्या है?
- इसरा: मस्जिद-ए-हराम (मक्का) से मस्जिद-ए-अक़्सा (बैतुल मुक़द्दस) तक रात का सफ़र। (सूरह बनी इसराईल 17:1)
- मेराज: मस्जिद-ए-अक़्सा से सातों आसमानों और सिदरतुल मुन्तहा तक का सफ़र। (सूरह नज्म 53:13-18)
سُبْحَانَ الَّذِيْٓ أَسْرٰى بِعَبْدِهٖ لَيْلًا مِّنَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ إِلَى الْمَسْجِدِ الْأَقْصَا الَّذِيْ بٰرَكْنَا حَوْلَهٗ لِنُرِيَهٗ مِنْ آيٰتِنَا
तर्जुमा: पाक है वो (अल्लाह) जो अपने बंदे को रातों-रात मस्जिद-ए-हराम से मस्जिद-ए-अक़्सा तक ले गया, जिसके आस-पास हमने बरकत रखी है, ताकि हम उसे अपनी कुछ निशानियाँ दिखाएँ। (सूरह बनी इसराईल 17:1)
मेराज का वाक़िया (सहीह हदीस से)
सहीह बुख़ारी (3887) और सहीह मुस्लिम (162) में ये वाक़िया तफ़सील से आया है। इसका ख़ुलासा ये है:
- हज़रत जिब्रील (अलैहिस्सलाम) आए, नबी ﷺ का सीना मुबारक खोलकर ज़मज़म से धोया गया और ईमान व हिकमत से भरा गया।
- बुराक़ नाम की सवारी लाई गई, जो गधे से बड़ी और ख़च्चर से छोटी थी, और उसका हर क़दम नज़र की आख़िरी हद पर पड़ता था।
- मस्जिद-ए-अक़्सा में नबी ﷺ ने तमाम नबियों की इमामत की।
- फिर आसमानों का सफ़र हुआ, और हर आसमान पर नबियों से मुलाक़ात हुई (टेबल नीचे है)।
- सिदरतुल मुन्तहा (बेरी का वो पेड़ जो सातवें आसमान पर है) तक पहुँचे, जहाँ नबी ﷺ ने अल्लाह की बड़ी निशानियाँ देखीं।
- वहीं उम्मत पर 50 नमाज़ें फ़र्ज़ हुईं, जो हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) के मशवरे पर बार-बार कम करवाते हुए 5 रह गईं।
किस आसमान पर किस नबी से मुलाक़ात हुई
| आसमान | नबी |
|---|---|
| पहला | हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) |
| दूसरा | हज़रत ईसा और हज़रत यह्या (अलैहिमस्सलाम) |
| तीसरा | हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) |
| चौथा | हज़रत इदरीस (अलैहिस्सलाम) |
| पाँचवाँ | हज़रत हारून (अलैहिस्सलाम) |
| छठा | हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) |
| सातवाँ | हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम), बैतुल मामूर के पास |
(सहीह बुख़ारी: 3887)
मेराज में उम्मत को मिले 3 तोहफ़े
- पाँच वक़्त की नमाज़: नमाज़ें पाँच हैं, लेकिन सवाब पचास का। (सहीह बुख़ारी: 349) इसीलिए नमाज़ को “मोमिन की मेराज” कहा जाता है। पाँचों नमाज़ की रकात
- सूरह बक़रह की आख़िरी दो आयतें अता की गईं।
- बख़्शिश की ख़ुशख़बरी: उम्मत में से जो शिर्क न करे, उसके बड़े गुनाह भी (अल्लाह चाहे तो) माफ़ किए जाएँगे। (सहीह मुस्लिम: 173)
हज़रत अबू बक्र “सिद्दीक़” कैसे बने?
जब नबी ﷺ ने सुबह मेराज का वाक़िया बताया, तो मक्का के काफ़िरों ने मज़ाक़ उड़ाया और हज़रत अबू बक्र (रज़ि.) के पास जाकर कहा कि देखो तुम्हारे साथी क्या कह रहे हैं। उन्होंने जवाब दिया: “अगर उन्होंने ऐसा कहा है तो सच कहा है।” इसी तस्दीक़ (पुष्टि) की वजह से उन्हें “सिद्दीक़” का लक़ब मिला।
शब-ए-मेराज की रात क्या करें?
इस रात के लिए कोई ख़ास नमाज़ या इबादत सहीह हदीस से तय नहीं की गई है, और उलमा में इस बारे में राय अलग है। आम तौर पर लोग ये नेक काम करते हैं, जिनमें कोई हर्ज नहीं:
- पाँचों नमाज़ें जमाअत से पढ़ने का पक्का इरादा करें, क्योंकि यही मेराज का असल तोहफ़ा है।
- नफ़्ल नमाज़, क़ुरआन की तिलावत, दुरूद शरीफ़ और इस्तिग़फ़ार।
- मेराज का वाक़िया घर वालों और बच्चों को सुनाएँ।
- पटाख़े, आतिशबाज़ी और फ़िज़ूलख़र्ची से बचें।
बहुत से लोग इस रात 12 रकात नफ़्ल पढ़ते हैं। उसका तरीका यहाँ है: शब-ए-मेराज की नमाज़ का तरीका | शब-ए-मेराज की नमाज़ की नियत
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
शब-ए-मेराज 2027 कब है?
भारत में अंदाज़न 5-6 जनवरी 2027 (27 रजब 1448) को। सही तारीख़ रजब का चाँद दिखने पर तय होगी।
मेराज किस सवारी पर हुई?
बुराक़ पर, जो गधे से बड़ा और ख़च्चर से छोटा सफ़ेद जानवर था (बुख़ारी: 3887)।
मेराज में कितनी नमाज़ें फ़र्ज़ हुईं?
पहले 50 फ़र्ज़ हुईं, जो कम होकर 5 रह गईं, लेकिन सवाब 50 का रखा गया (बुख़ारी: 349)।
क्या मेराज जिस्म के साथ हुई थी?
अहले सुन्नत के अक़ीदे के मुताबिक़ मेराज जागते हुए, रूह और जिस्म दोनों के साथ हुई।
क्या शब-ए-मेराज की कोई ख़ास नमाज़ है?
सहीह हदीस में इस रात की कोई ख़ास नमाज़ तय नहीं है। आम नफ़्ल इबादत कर सकते हैं।
क्या मेराज वाक़ई 27 रजब को हुई थी?
मेराज की तारीख़ के बारे में मुअर्रिख़ीन में इख़्तिलाफ़ है। भारत-पाकिस्तान में 27 रजब मशहूर है।
आख़िरी बात
मेराज का सबसे बड़ा पैग़ाम नमाज़ है। इस शब-ए-मेराज पर बस एक रात की इबादत के बजाय पाँचों नमाज़ों की पाबंदी का इरादा करें, यही इस रात का असली तोहफ़ा है।
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