Dard Ki Dua: जिस्म में कहीं भी दर्द हो, चाहे सिर, दाँत, पेट, कमर या घुटने में, तो दर्द की जगह पर हाथ रखकर तीन बार “बिस्मिल्लाह” कहें, फिर सात बार ये पढ़ें: “अऊज़ु बिल्लाहि व क़ुदरतिही मिन शर्रि मा अजिदु व उहाज़िर”। ये तरीका नबी ﷺ ने ख़ुद सिखाया है। (सहीह मुस्लिम: 2202)
इस पोस्ट में दर्द की ये दुआ अरबी, हिंदी, इंग्लिश और तर्जुमे के साथ है। साथ में बीमार पर दम करने की दुआ, बीमार-पुर्सी (अयादत) की दुआ और हज़रत अय्यूब (अलैहिस्सलाम) की दुआ भी है।
दर्द और बीमारी की दुआएँ एक नज़र में
| मौक़ा | दुआ | हवाला |
|---|---|---|
| किसी भी दर्द पर (ख़ुद के लिए) | बिस्मिल्लाह (3) + अऊज़ु बिल्लाहि व क़ुदरतिही… (7) | मुस्लिम: 2202 |
| किसी बीमार पर दम करने के लिए | अल्लाहुम्मा रब्बन नास, अज़्हिबिल बास… | बुख़ारी: 5743 |
| बीमार-पुर्सी (अयादत) के वक़्त | अस्अलुल्लाहल अज़ीम… (7 बार) | अबू दाऊद: 3106 |
| लंबी तकलीफ़ में | अन्नी मस्सनियज़ ज़ुर्रु… | सूरह अंबिया 21:83 |

Dard Ki Dua in Arabic
بِسْمِ اللّٰهِ (ثَلَاثًا)، أَعُوْذُ بِاللّٰهِ وَقُدْرَتِهٖ مِنْ شَرِّ مَا أَجِدُ وَأُحَاذِرُ (سَبْعَ مَرَّاتٍ)
Dard Ki Dua in Hindi
बिस्मिल्लाह (3 बार), अऊज़ु बिल्लाहि व क़ुदरतिही मिन शर्रि मा अजिदु व उहाज़िर (7 बार)
Dard Ki Dua in English
Bismillah (3 times), A’oozu billahi wa qudratihi min sharri ma ajidu wa uhazir (7 times)
तर्जुमा
अल्लाह के नाम से। मैं अल्लाह और उसकी क़ुदरत की पनाह माँगता हूँ उस तकलीफ़ की बुराई से जो मैं महसूस कर रहा हूँ और जिसका मुझे डर है।
इस दुआ का वाक़िया
हज़रत उस्मान बिन अबिल आस (रज़ि.) ने नबी ﷺ से अपने जिस्म में दर्द की शिकायत की। आप ﷺ ने फ़रमाया: दर्द की जगह पर अपना हाथ रखो, तीन बार बिस्मिल्लाह कहो और सात बार ये कलिमात पढ़ो। (सहीह मुस्लिम: 2202)
सिर दर्द, दाँत दर्द और पेट दर्द की दुआ
हदीस में हर तरह के दर्द के लिए यही एक दुआ है। सिर दर्द हो तो सिर पर, दाँत दर्द हो तो गाल पर, पेट दर्द हो तो पेट पर हाथ रखकर यही पढ़ें। अलग-अलग दर्द के लिए अलग “वज़ीफ़े” सहीह हदीस से साबित नहीं हैं।
किसी बीमार पर दम करने की दुआ
नबी ﷺ जब किसी बीमार के पास जाते या कोई बीमार आपके पास लाया जाता, तो ये दुआ पढ़ते: (सहीह बुख़ारी: 5743)
اَللّٰهُمَّ رَبَّ النَّاسِ، أَذْهِبِ الْبَأْسَ، اشْفِ أَنْتَ الشَّافِيْ، لَا شِفَاءَ إِلَّا شِفَاؤُكَ، شِفَاءً لَّا يُغَادِرُ سَقَمًا
हिंदी: अल्लाहुम्मा रब्बन नास, अज़्हिबिल बास, इश्फ़ि अन्तश शाफ़ी, ला शिफ़ाआ इल्ला शिफ़ाउक, शिफ़ाअल ला युग़ादिरु सक़मा
तर्जुमा: ऐ अल्लाह, लोगों के रब! तकलीफ़ को दूर कर दे, शिफ़ा दे, तू ही शिफ़ा देने वाला है, तेरी शिफ़ा के सिवा कोई शिफ़ा नहीं, ऐसी शिफ़ा दे जो कोई बीमारी बाक़ी न छोड़े।
बीमार-पुर्सी (अयादत) की दुआ
नबी ﷺ ने फ़रमाया: जो किसी ऐसे बीमार की अयादत करे जिसकी मौत का वक़्त न आया हो, और उसके पास सात बार ये कहे, तो अल्लाह उसे शिफ़ा दे देता है: (अबू दाऊद: 3106, तिर्मिज़ी: 2083)
أَسْأَلُ اللّٰهَ الْعَظِيْمَ، رَبَّ الْعَرْشِ الْعَظِيْمِ، أَنْ يَّشْفِيَكَ
हिंदी: अस्अलुल्लाहल अज़ीम, रब्बल अर्शिल अज़ीम, अंय यश्फ़ियक (7 बार)
तर्जुमा: मैं अज़मत वाले अल्लाह से, जो अज़ीम अर्श का रब है, सवाल करता हूँ कि वो तुम्हें शिफ़ा दे।
बीमार से मिलते वक़्त ये भी कह सकते हैं: “ला बअ्सा, तहूरुन इंशाअल्लाह” (कोई बात नहीं, इंशाअल्लाह ये (बीमारी) गुनाहों से पाक करने वाली है)। (सहीह बुख़ारी: 3616)
लंबी बीमारी और तकलीफ़ में हज़रत अय्यूब की दुआ
أَنِّيْ مَسَّنِيَ الضُّرُّ وَأَنْتَ أَرْحَمُ الرّٰحِمِيْنَ
हिंदी: अन्नी मस्सनियज़ ज़ुर्रु व अन्ता अरहमुर राहिमीन (सूरह अंबिया 21:83)
तर्जुमा: (ऐ मेरे रब!) मुझे तकलीफ़ पहुँची है, और तू सब रहम करने वालों से बढ़कर रहम करने वाला है।
इलाज भी सुन्नत है: नबी ﷺ ने फ़रमाया: अल्लाह ने कोई बीमारी ऐसी नहीं उतारी जिसकी दवा न उतारी हो। (सहीह बुख़ारी: 5678) इसलिए दुआ के साथ डॉक्टर को ज़रूर दिखाएँ, ख़ास तौर पर तेज़ या लगातार दर्द में।
बुख़ार के लिए अलग दुआ: बुख़ार की दुआ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
दर्द की सबसे सहीह दुआ कौन सी है?
दर्द की जगह हाथ रखकर तीन बार “बिस्मिल्लाह” और सात बार “अऊज़ु बिल्लाहि व क़ुदरतिही मिन शर्रि मा अजिदु व उहाज़िर” (मुस्लिम: 2202)।
सिर दर्द की दुआ कौन सी है?
सिर पर हाथ रखकर यही दुआ पढ़ें। हदीस में हर दर्द के लिए यही दुआ है।
किसी दूसरे के दर्द के लिए क्या पढ़ें?
“अल्लाहुम्मा रब्बन नास, अज़्हिबिल बास…” पढ़कर उस पर दम करें (बुख़ारी: 5743)।
बीमार की अयादत में क्या कहें?
“अस्अलुल्लाहल अज़ीम, रब्बल अर्शिल अज़ीम, अंय यश्फ़ियक” सात बार (अबू दाऊद: 3106)।
क्या दुआ के साथ दवा लेना ज़रूरी है?
हाँ, इलाज करवाना भी सुन्नत है (बुख़ारी: 5678)। दुआ और दवा दोनों साथ चलें।
क्या दर्द और बीमारी से गुनाह माफ़ होते हैं?
हाँ, मुसलमान को जो भी तकलीफ़ पहुँचे, अल्लाह उसके बदले उसके गुनाह माफ़ करता है (बुख़ारी: 5641)।
आख़िरी बात
दर्द के वक़्त घबराने के बजाय नबी ﷺ का बताया ये छोटा सा अमल करें: हाथ रखें, बिस्मिल्लाह कहें और सात बार दुआ पढ़ें। साथ में इलाज भी कराएँ, और याद रखें कि हर तकलीफ़ गुनाहों के माफ़ होने का ज़रिया है।
ये भी पढ़ें: बुख़ार की दुआ | नज़र की दुआ | चारों क़ुल | सोने की दुआ