Barish Ki Dua: बारिश के लिए तीन अलग-अलग दुआएँ हैं। बारिश माँगने के लिए “अल्लाहुम्मा अग़िस्ना” (3 बार), बारिश होते वक़्त “अल्लाहुम्मा सय्यिबन नाफ़िआ”, और ज़्यादा बारिश रोकने के लिए “अल्लाहुम्मा हवालैना व ला अलैना”। ये तीनों सहीह बुख़ारी में हैं।
इस पोस्ट में ये सब दुआएँ अरबी, हिंदी, इंग्लिश और तर्जुमे के साथ मिलेंगी। साथ ही बारिश के बाद की दुआ, बादल गरजने और तेज़ हवा-तूफ़ान की दुआ, और बारिश से जुड़ी सुन्नतें भी हदीस के हवाले से बताई गई हैं।
बारिश की सारी दुआएँ एक नज़र में
| मौक़ा | दुआ | हवाला |
|---|---|---|
| बारिश माँगने के लिए | अल्लाहुम्मा अग़िस्ना (3 बार) | बुख़ारी: 1014 |
| बारिश होते वक़्त | अल्लाहुम्मा सय्यिबन नाफ़िआ | बुख़ारी: 1032 |
| बारिश के बाद | मुतिरना बि फ़ज़्लिल्लाहि व रहमतिह | बुख़ारी: 846 |
| ज़्यादा बारिश रोकने के लिए | अल्लाहुम्मा हवालैना व ला अलैना | बुख़ारी: 1013 |
| तेज़ हवा / आँधी | अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका ख़ैरहा… | मुस्लिम: 899 |
| बादल गरजने पर | सुब्हानल्लज़ी युसब्बिहुर रअदु बि हम्दिही… | मुवत्ता इमाम मालिक |
1. बारिश होने की दुआ (बारिश माँगने की दुआ)
नबी ﷺ जुमे का ख़ुतबा दे रहे थे कि एक शख़्स ने कहा: या रसूलल्लाह! माल (जानवर) हलाक हो गए और रास्ते बंद हो गए, अल्लाह से दुआ कीजिए कि बारिश बरसाए। नबी ﷺ ने हाथ उठाए और तीन बार ये दुआ की, और उसी वक़्त बादल आ गए: (सहीह बुख़ारी: 1014)
اَللّٰهُمَّ أَغِثْنَا، اَللّٰهُمَّ أَغِثْنَا، اَللّٰهُمَّ أَغِثْنَا
हिंदी: अल्लाहुम्मा अग़िस्ना, अल्लाहुम्मा अग़िस्ना, अल्लाहुम्मा अग़िस्ना
English: Allahumma aghithna, Allahumma aghithna, Allahumma aghithna
तर्जुमा: ऐ अल्लाह! हमें बारिश (मदद) दे। ऐ अल्लाह! हमें बारिश दे। ऐ अल्लाह! हमें बारिश दे।
बारिश माँगने की दूसरी दुआ
एक और रिवायत में नबी ﷺ से ये दुआ आई है: (अबू दाऊद: 1169)
اَللّٰهُمَّ اسْقِنَا غَيْثًا مُّغِيْثًا مَّرِيْئًا مَّرِيْعًا، نَّافِعًا غَيْرَ ضَارٍّ، عَاجِلًا غَيْرَ آجِلٍ
हिंदी: अल्लाहुम्मस्क़िना ग़ैसम मुग़ीसम मरीअम मरीआ, नाफ़िअन ग़ैरा ज़ार्र, आजिलन ग़ैरा आजिल
तर्जुमा: ऐ अल्लाह! हमें ऐसी बारिश से सैराब कर जो मदद करने वाली हो, ख़ुशगवार हो, हरियाली लाने वाली हो, फ़ायदा दे और नुक़सान न दे, जल्दी आए और देर न करे।
2. बारिश होते वक़्त की दुआ
हज़रत आइशा (रज़ि.) फ़रमाती हैं कि नबी ﷺ जब बारिश देखते तो ये दुआ पढ़ते: (सहीह बुख़ारी: 1032)
اَللّٰهُمَّ صَيِّبًا نَّافِعًا
हिंदी: अल्लाहुम्मा सय्यिबन नाफ़िआ
English: Allahumma sayyiban nafi’a
तर्जुमा: ऐ अल्लाह! इसे फ़ायदा देने वाली बारिश बना दे।
3. बारिश रुकने के बाद की दुआ
एक हदीस-ए-क़ुदसी में है कि बारिश के बाद जो कहे “हम पर अल्लाह के फ़ज़्ल और रहमत से बारिश हुई”, वो अल्लाह पर ईमान रखने वाला है। (सहीह बुख़ारी: 846)
مُطِرْنَا بِفَضْلِ اللّٰهِ وَرَحْمَتِهٖ
हिंदी: मुतिरना बि फ़ज़्लिल्लाहि व रहमतिह
तर्जुमा: हम पर अल्लाह के फ़ज़्ल और उसकी रहमत से बारिश हुई।
4. बारिश रोकने की दुआ
जब लगातार बारिश से नुक़सान होने लगा, तो अगले जुमे उसी शख़्स ने अर्ज़ किया कि अब घर गिर रहे हैं, बारिश रुकने की दुआ कीजिए। नबी ﷺ ने ये दुआ की और बादल छँट गए: (सहीह बुख़ारी: 1013)
اَللّٰهُمَّ حَوَالَيْنَا وَلَا عَلَيْنَا، اَللّٰهُمَّ عَلَى الْآكَامِ وَالظِّرَابِ، وَبُطُوْنِ الْأَوْدِيَةِ، وَمَنَابِتِ الشَّجَرِ
हिंदी: अल्लाहुम्मा हवालैना व ला अलैना, अल्लाहुम्मा अलल आकामि वज़्ज़िराबि, व बुतूनिल औदियति, व मनाबितिश शजर
English: Allahumma hawalaina wa la ‘alaina, Allahumma ‘alal aakami waz-zirabi, wa butoonil audiyati, wa manabitish shajar
तर्जुमा: ऐ अल्लाह! हमारे आस-पास बरसा, हम पर नहीं। ऐ अल्लाह! टीलों, पहाड़ियों, वादियों के बीच और पेड़ उगने की जगहों पर बरसा।
ध्यान दें: इस दुआ में बारिश को पूरी तरह बंद करने की दुआ नहीं माँगी गई, बल्कि उसे वहाँ भेजने की दुआ है जहाँ उससे फ़ायदा हो। बारिश अल्लाह की रहमत है, इसे बुरा-भला न कहें।
5. तेज़ हवा और आँधी-तूफ़ान की दुआ
हज़रत आइशा (रज़ि.) फ़रमाती हैं कि जब तेज़ हवा चलती तो नबी ﷺ ये दुआ पढ़ते: (सहीह मुस्लिम: 899)
اَللّٰهُمَّ إِنِّيْ أَسْأَلُكَ خَيْرَهَا وَخَيْرَ مَا فِيْهَا وَخَيْرَ مَآ أُرْسِلَتْ بِهٖ، وَأَعُوْذُ بِكَ مِنْ شَرِّهَا وَشَرِّ مَا فِيْهَا وَشَرِّ مَآ أُرْسِلَتْ بِهٖ
हिंदी: अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका ख़ैरहा व ख़ैरा मा फ़ीहा व ख़ैरा मा उर्सिलत बिह, व अऊज़ु बिका मिन शर्रिहा व शर्रि मा फ़ीहा व शर्रि मा उर्सिलत बिह
तर्जुमा: ऐ अल्लाह! मैं तुझसे इस (हवा) की भलाई, इसमें जो कुछ है उसकी भलाई, और जिस (मक़सद) के साथ ये भेजी गई उसकी भलाई माँगता हूँ; और इसकी बुराई, इसमें जो कुछ है उसकी बुराई, और जिसके साथ ये भेजी गई उसकी बुराई से तेरी पनाह माँगता हूँ।
6. बादल गरजने (बिजली कड़कने) की दुआ
हज़रत अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर (रज़ि.) जब बादल की गरज सुनते तो बात करना छोड़ देते और ये पढ़ते: (मुवत्ता इमाम मालिक)
سُبْحَانَ الَّذِيْ يُسَبِّحُ الرَّعْدُ بِحَمْدِهٖ وَالْمَلٰٓئِكَةُ مِنْ خِيْفَتِهٖ
हिंदी: सुब्हानल्लज़ी युसब्बिहुर रअदु बि हम्दिही वल मलाइकतु मिन ख़ीफ़तिह
तर्जुमा: पाक है वो ज़ात जिसकी तस्बीह गरज उसकी तारीफ़ के साथ करती है, और फ़रिश्ते उसके डर से (तस्बीह करते हैं)। (ये अल्फ़ाज़ सूरह रअद 13:13 से लिए गए हैं।)
बारिश से जुड़ी सुन्नतें
- बारिश में भीगना: हज़रत अनस (रज़ि.) फ़रमाते हैं कि बारिश हुई तो नबी ﷺ ने अपना कपड़ा थोड़ा हटाया ताकि बारिश बदन पर लगे, और फ़रमाया: ये अभी-अभी अपने रब के पास से आई है। (सहीह मुस्लिम: 898)
- बारिश के वक़्त दुआ करें: कुछ रिवायतों में बारिश के वक़्त को दुआ क़बूल होने का वक़्त बताया गया है (अबू दाऊद: 2540), इसलिए बारिश में अपनी ज़रूरतों के लिए दुआ करें।
- इस्तिग़फ़ार: क़ुरआन में है कि अपने रब से माफ़ी माँगो, वो तुम पर आसमान से ख़ूब बारिश बरसाएगा। (सूरह नूह 71:10-11)
- सलातुल इस्तिस्क़ा: सूखा पड़ने पर नबी ﷺ लोगों को लेकर बाहर निकले, बारिश की दुआ की, अपनी चादर पलटी और दो रकात नमाज़ पढ़ाई। (सहीह बुख़ारी: 1012) ये नमाज़ इमाम के साथ जमाअत से पढ़ी जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
बारिश होने की दुआ कौन सी है?
“अल्लाहुम्मा अग़िस्ना” तीन बार। नबी ﷺ ने जुमे के ख़ुतबे में यही दुआ की थी (बुख़ारी: 1014)।
बारिश होते वक़्त क्या पढ़ना चाहिए?
“अल्लाहुम्मा सय्यिबन नाफ़िआ”, यानी ऐ अल्लाह इसे फ़ायदेमंद बारिश बना दे (बुख़ारी: 1032)।
बारिश रोकने की दुआ कौन सी है?
“अल्लाहुम्मा हवालैना व ला अलैना…” (बुख़ारी: 1013)। इसमें बारिश को उन जगहों पर भेजने की दुआ है जहाँ उससे फ़ायदा हो।
क्या बारिश में दुआ क़बूल होती है?
कुछ रिवायतों (अबू दाऊद: 2540) में बारिश के वक़्त को दुआ क़बूल होने का वक़्त बताया गया है, इसलिए इस वक़्त ख़ूब दुआ करें।
बिजली कड़कने पर क्या पढ़ें?
“सुब्हानल्लज़ी युसब्बिहुर रअदु बि हम्दिही वल मलाइकतु मिन ख़ीफ़तिह” पढ़ें, जैसा हज़रत अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर (रज़ि.) पढ़ते थे।
सूखा पड़ने पर कौन सी नमाज़ पढ़ें?
सलातुल इस्तिस्क़ा, यानी बारिश माँगने की दो रकात नमाज़, जो इमाम के साथ खुले मैदान में पढ़ी जाती है (बुख़ारी: 1012)।
आख़िरी बात
बारिश अल्लाह की बड़ी रहमत है। बारिश न हो तो “अल्लाहुम्मा अग़िस्ना” के साथ इस्तिग़फ़ार करें, बारिश हो तो “अल्लाहुम्मा सय्यिबन नाफ़िआ” पढ़कर शुक्र करें, और ज़्यादा हो जाए तो “हवालैना व ला अलैना” से दुआ करें, शिकायत नहीं।
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