Isha Ki Namaz Ki Rakat: ईशा की नमाज़ में कुल 17 रकात होती हैं: 4 सुन्नत, 4 फ़र्ज़, 2 सुन्नत, 2 नफ़्ल, 3 वित्र और 2 नफ़्ल। इनमें 4 फ़र्ज़ और 3 वित्र (वाजिब) किसी हाल में नहीं छोड़ने चाहिए। नीचे पूरी टेबल, पढ़ने की तरतीब, नियत, वक़्त और फ़ज़ीलत हदीस के साथ है।
Isha Ki Namaz Ki Rakat: एक नज़र में
| क्रम | रकात | क़िस्म | हुक्म |
|---|---|---|---|
| 1 | 4 | सुन्नत ग़ैर-मुअक्कदा | पढ़ें तो सवाब |
| 2 | 4 | फ़र्ज़ | फ़र्ज़, जमाअत के साथ |
| 3 | 2 | सुन्नत-ए-मुअक्कदा | ताकीद वाली, न छोड़ें |
| 4 | 2 | नफ़्ल | पढ़ें तो सवाब |
| 5 | 3 | वित्र | वाजिब (हनफ़ी), न छोड़ें |
| 6 | 2 | नफ़्ल | पढ़ें तो सवाब |
कुल: 17 रकात। कम से कम ज़रूरी: 4 फ़र्ज़ + 3 वित्र = 7 रकात। साथ में 2 सुन्नत-ए-मुअक्कदा भी न छोड़ें।

ईशा की नमाज़ पढ़ने की तरतीब
- ईशा का वक़्त शुरू होने पर पहले 4 रकात सुन्नत पढ़ें।
- फिर 4 रकात फ़र्ज़ जमाअत से पढ़ें। पहली दो रकात में क़िरात बुलंद आवाज़ से होती है।
- फ़र्ज़ के बाद 2 रकात सुन्नत, फिर 2 रकात नफ़्ल।
- फिर 3 रकात वित्र पढ़ें, जिसकी तीसरी रकात में दुआ-ए-क़ुनूत पढ़ी जाती है।
- आख़िर में 2 रकात नफ़्ल पढ़ें।
ईशा की नमाज़ की नियत
फ़र्ज़ की नियत: “नियत की मैंने चार रकात नमाज़ फ़र्ज़, वक़्त ईशा का, वास्ते अल्लाह तआला के, (इमाम के पीछे हों तो: पीछे इस इमाम के), मुँह मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर।”
वित्र की नियत: “नियत की मैंने तीन रकात नमाज़ वित्र वाजिब, वक़्त ईशा का, वास्ते अल्लाह तआला के, मुँह मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर।”
नियत असल में दिल के इरादे का नाम है। ज़बान से कहना ज़रूरी नहीं, लेकिन कह लेना बेहतर है। पूरी जानकारी: ईशा की नमाज़ की नियत
ईशा की नमाज़ का वक़्त
ईशा का वक़्त मग़रिब का वक़्त ख़त्म होने (शफ़क़ ग़ायब होने) के बाद शुरू होता है और सुबह सादिक़ तक रहता है। लेकिन आधी रात से पहले पढ़ लेना बेहतर है, और बिना वजह आधी रात के बाद तक टालना मकरूह है।
ईशा की नमाज़ की फ़ज़ीलत
- आधी रात की इबादत: जिसने ईशा जमाअत से पढ़ी, गोया उसने आधी रात इबादत की। (सहीह मुस्लिम: 656)
- वित्र की ताकीद: नबी ﷺ ने फ़रमाया: अपनी रात की नमाज़ का आख़िरी हिस्सा वित्र को बनाओ। (सहीह बुख़ारी: 998)
- जन्नत में घर: ईशा के बाद की 2 सुन्नत उन 12 रकात में हैं जिन पर जन्नत में घर का वादा है। (तिर्मिज़ी: 415)
वित्र की नमाज़ (3 रकात)
हनफ़ी मसलक में वित्र वाजिब है। ये 3 रकात एक सलाम से पढ़ी जाती है: दूसरी रकात के बाद अत्तहिय्यात के लिए बैठें, तीसरी रकात में सूरह के बाद “अल्लाहु अकबर” कहकर हाथ उठाएँ, फिर हाथ बाँधकर दुआ-ए-क़ुनूत पढ़ें, फिर रुकू करें। पूरा तरीका: वित्र नमाज़ का तरीका
तहज्जुद पढ़ने वालों के लिए: अगर रात में उठने का पक्का यक़ीन हो तो वित्र तहज्जुद के बाद पढ़ना अफ़ज़ल है, वरना ईशा के साथ ही पढ़ लें। (सहीह मुस्लिम: 755)
5 वक़्त की नमाज़ की कुल रकात
| नमाज़ | कुल रकात |
|---|---|
| फ़ज्र | 4 |
| ज़ुहर | 12 |
| अस्र | 8 |
| मग़रिब | 7 |
| ईशा | 17 |
| जुमा (ज़ुहर की जगह) | 14 |
सुन्नत, फ़र्ज़ और नफ़्ल का पूरा चार्ट: नमाज़ की रकात चार्ट
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
ईशा की नमाज़ में कितनी रकात होती हैं?
कुल 17 रकात: 4 सुन्नत, 4 फ़र्ज़, 2 सुन्नत, 2 नफ़्ल, 3 वित्र, 2 नफ़्ल।
ईशा में कम से कम कितनी रकात ज़रूरी हैं?
4 फ़र्ज़ और 3 वित्र (वाजिब), यानी 7 रकात। 2 सुन्नत-ए-मुअक्कदा भी न छोड़ें।
क्या वित्र ईशा का हिस्सा है?
वित्र का वक़्त ईशा के बाद से सुबह सादिक़ तक है। आम तौर पर ईशा के साथ पढ़ा जाता है, इसलिए रकात गिनती में शामिल किया जाता है।
ईशा की पहली 4 सुन्नत ज़रूरी हैं?
नहीं, ये सुन्नत ग़ैर-मुअक्कदा हैं। पढ़ें तो सवाब, छोड़ें तो गुनाह नहीं।
ईशा की नमाज़ कब तक पढ़ सकते हैं?
सुबह सादिक़ तक, लेकिन आधी रात से पहले पढ़ना बेहतर है।
सफ़र में ईशा कितनी रकात पढ़ें?
मुसाफ़िर 4 फ़र्ज़ की जगह 2 पढ़ेगा, लेकिन वित्र पूरे 3 पढ़ेगा।
आख़िरी बात
ईशा की 17 रकात देखकर घबराएँ नहीं: 7 रकात (4 फ़र्ज़ + 3 वित्र) ज़रूरी हैं, 2 सुन्नत ताकीद वाली हैं, और बाक़ी सवाब बढ़ाने के लिए हैं। रोज़ का दिन ईशा और वित्र पर ख़त्म करें।
ये भी पढ़ें: ईशा की नमाज़ का तरीका | ईशा की नियत | वित्र की नियत | दुआ-ए-क़ुनूत
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