Namaz Ke Baad Ki Dua: फ़र्ज़ नमाज़ का सलाम फेरने के बाद नबी ﷺ पहले तीन बार “अस्तग़फ़िरुल्लाह” कहते, फिर “अल्लाहुम्मा अन्तस सलाम व मिन्कस सलाम, तबारक्ता या ज़ल जलालि वल इकराम” पढ़ते थे। (सहीह मुस्लिम: 591)
इस पोस्ट में नमाज़ के बाद की 7 मसनून दुआएँ और अज़कार हैं, सब अरबी, हिंदी, तर्जुमा और सहीह हवाले के साथ, उसी तरतीब में जैसे पढ़े जा सकते हैं।
नमाज़ के बाद की दुआएँ एक नज़र में
| क्रम | दुआ | हवाला |
|---|---|---|
| 1 | अस्तग़फ़िरुल्लाह (3 बार) + अल्लाहुम्मा अन्तस सलाम… | मुस्लिम: 591 |
| 2 | ला इलाहा इल्लल्लाहु वह्दहू… अल्लाहुम्मा ला मानिआ… | बुख़ारी: 844 |
| 3 | अल्लाहुम्मा अइन्नी अला ज़िक्रिका… | अबू दाऊद: 1522 |
| 4 | आयतुल कुर्सी | नसाई (सुनन कुबरा): 9928 |
| 5 | तस्बीह 33-33-33 + कलिमा | मुस्लिम: 597 |
| 6 | सूरह फ़लक़ और नास | अबू दाऊद: 1523 |
| 7 | रब्बना आतिना… | बुख़ारी: 6389 |

1. सलाम के फ़ौरन बाद की दुआ
أَسْتَغْفِرُ اللّٰهَ (ثَلَاثًا)، اَللّٰهُمَّ أَنْتَ السَّلَامُ وَمِنْكَ السَّلَامُ، تَبَارَكْتَ يَا ذَا الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ
हिंदी: अस्तग़फ़िरुल्लाह (3 बार), अल्लाहुम्मा अन्तस सलाम व मिन्कस सलाम, तबारक्ता या ज़ल जलालि वल इकराम
तर्जुमा: मैं अल्लाह से माफ़ी माँगता हूँ। ऐ अल्लाह! तू ही सलामती वाला है और तुझ ही से सलामती है, तू बरकत वाला है ऐ जलाल और इज़्ज़त वाले। (सहीह मुस्लिम: 591)
2. तौहीद की दुआ
لَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ وَحْدَهٗ لَا شَرِيْكَ لَهٗ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيْرٌ، اَللّٰهُمَّ لَا مَانِعَ لِمَآ أَعْطَيْتَ، وَلَا مُعْطِيَ لِمَا مَنَعْتَ، وَلَا يَنْفَعُ ذَا الْجَدِّ مِنْكَ الْجَدُّ
हिंदी: ला इलाहा इल्लल्लाहु वह्दहू ला शरी-क लहू, लहुल मुल्कु व लहुल हम्दु व हु-व अला कुल्लि शैइन क़दीर, अल्लाहुम्मा ला मानिआ लिमा अअ्तैत, व ला मुअ्तिया लिमा मनअ्त, व ला यन्फ़उ ज़ल जद्दि मिन्कल जद्द
तर्जुमा: अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वो अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं, उसी की बादशाहत और उसी की तारीफ़ है, और वो हर चीज़ पर क़ादिर है। ऐ अल्लाह! जो तू दे उसे कोई रोक नहीं सकता, और जो तू रोक ले उसे कोई दे नहीं सकता, और किसी मालदार को उसकी मालदारी तेरे मुक़ाबले में फ़ायदा नहीं दे सकती। (सहीह बुख़ारी: 844)
3. इबादत में मदद की दुआ
नबी ﷺ ने हज़रत मुआज़ (रज़ि.) का हाथ पकड़कर फ़रमाया: ऐ मुआज़! अल्लाह की क़सम मैं तुमसे मोहब्बत करता हूँ, हर नमाज़ के बाद ये दुआ कभी न छोड़ना: (अबू दाऊद: 1522)
اَللّٰهُمَّ أَعِنِّيْ عَلٰى ذِكْرِكَ وَشُكْرِكَ وَحُسْنِ عِبَادَتِكَ
हिंदी: अल्लाहुम्मा अइन्नी अला ज़िक्रिका व शुक्रिका व हुस्नि इबादतिक
तर्जुमा: ऐ अल्लाह! अपने ज़िक्र, अपने शुक्र और अपनी अच्छी इबादत में मेरी मदद फ़रमा।
4. आयतुल कुर्सी
जो हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़े, उसके और जन्नत के बीच सिर्फ़ मौत की रुकावट है। (नसाई, सुनन कुबरा: 9928) पूरी आयत यहाँ पढ़ें: आयतुल कुर्सी हिंदी में
5. तस्बीह-ए-फ़ातिमा
33 बार सुब्हानल्लाह, 33 बार अल्हम्दुलिल्लाह, 33 बार अल्लाहु अकबर, और 100 पूरा करने के लिए एक बार “ला इलाहा इल्लल्लाहु वह्दहू ला शरी-क लहू, लहुल मुल्कु व लहुल हम्दु व हु-व अला कुल्लि शैइन क़दीर”। जो ऐसा करे उसके गुनाह माफ़ हो जाते हैं, चाहे समुंदर के झाग के बराबर हों। (सहीह मुस्लिम: 597) तफ़सील: नमाज़ के बाद की तस्बीह
6. सूरह फ़लक़ और सूरह नास
नबी ﷺ ने हुक्म दिया कि हर नमाज़ के बाद मुअव्विज़ात (फ़लक़ और नास) पढ़ा करो। (अबू दाऊद: 1523) पूरी सूरतें: चारों क़ुल हिंदी में
7. दुनिया और आख़िरत की भलाई की दुआ
رَبَّنَآ آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَّفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَّقِنَا عَذَابَ النَّارِ
हिंदी: रब्बना आतिना फ़िद्दुन्या हसनतंव व फ़िल आख़िरति हसनतंव व क़िना अज़ाबन नार
तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भी भलाई दे और आख़िरत में भी भलाई दे, और हमें आग के अज़ाब से बचा। नबी ﷺ सबसे ज़्यादा यही दुआ माँगते थे। (सहीह बुख़ारी: 6389)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
नमाज़ के बाद सबसे पहले क्या पढ़ें?
तीन बार “अस्तग़फ़िरुल्लाह”, फिर “अल्लाहुम्मा अन्तस सलाम व मिन्कस सलाम, तबारक्ता या ज़ल जलालि वल इकराम” (मुस्लिम: 591)।
क्या नमाज़ के बाद हाथ उठाकर दुआ करना जायज़ है?
हाँ, दुआ में हाथ उठाना जायज़ है और नबी ﷺ से कई मौक़ों पर साबित है। ऊपर के अज़कार पढ़कर अपनी ज़बान में भी दुआ माँग सकते हैं।
क्या हर नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़नी चाहिए?
हाँ, हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ने की बड़ी फ़ज़ीलत है (नसाई: 9928)।
सुन्नत वाली नमाज़ों में ये दुआएँ कब पढ़ें?
ज़ुहर, मग़रिब और ईशा में फ़र्ज़ के बाद “अल्लाहुम्मा अन्तस सलाम” पढ़कर सुन्नतें पढ़ सकते हैं, और बाक़ी अज़कार सुन्नतों के बाद।
क्या ये दुआएँ अपनी ज़बान (हिंदी/उर्दू) में माँग सकते हैं?
मसनून दुआएँ अरबी में पढ़ना बेहतर है, लेकिन नमाज़ के बाहर अपनी ज़बान में भी दुआ माँग सकते हैं।
नमाज़ के बाद की दुआ कितनी देर की होनी चाहिए?
कोई तय वक़्त नहीं। ऊपर के अज़कार 5-7 मिनट में पूरे हो जाते हैं।
आख़िरी बात
नमाज़ के बाद के ये कुछ मिनट बहुत क़ीमती हैं। सलाम फेरकर फ़ौरन उठने के बजाय ये अज़कार पढ़ें। गुनाहों की माफ़ी, जन्नत का वादा और इबादत में मदद, सब इन्हीं में है।
ये भी पढ़ें: नमाज़ के बाद की तस्बीह | आयतुल कुर्सी | दुआ माँगने का तरीका | नमाज़ में पढ़ने वाली दुआ
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