Tahajjud Ki Dua in Hindi: तहज्जुद की दुआ अरबी, हिंदी और तर्जुमा के साथ

Tahajjud Ki Dua: नबी ﷺ जब रात में तहज्जुद के लिए खड़े होते तो ये दुआ पढ़ते थे: “अल्लाहुम्मा लकल हम्दु अन्ता नूरुस समावाति वल अर्ज़ि व मन फ़ीहिन्न…” (सहीह बुख़ारी: 1120)। ये तहज्जुद की सबसे मशहूर और सहीह दुआ है।

इस पोस्ट में ये पूरी दुआ अरबी, हिंदी, इंग्लिश और तर्जुमे के साथ दी गई है। साथ में रात को जागते ही पढ़ने वाली दुआ, तहज्जुद के बाद दुआ माँगने का तरीका, और तहज्जुद की रकात और वक़्त की जानकारी भी है।

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Tahajjud Ki Dua in Arabic

اَللّٰهُمَّ لَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ نُوْرُ السَّمٰوٰتِ وَالْأَرْضِ وَمَنْ فِيْهِنَّ، وَلَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ قَيِّمُ السَّمٰوٰتِ وَالْأَرْضِ وَمَنْ فِيْهِنَّ، وَلَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ الْحَقُّ، وَوَعْدُكَ الْحَقُّ، وَلِقَاؤُكَ حَقٌّ، وَقَوْلُكَ حَقٌّ، وَالْجَنَّةُ حَقٌّ، وَالنَّارُ حَقٌّ، وَالنَّبِيُّوْنَ حَقٌّ، وَمُحَمَّدٌ ﷺ حَقٌّ، وَالسَّاعَةُ حَقٌّ، اَللّٰهُمَّ لَكَ أَسْلَمْتُ، وَبِكَ آمَنْتُ، وَعَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ، وَإِلَيْكَ أَنَبْتُ، وَبِكَ خَاصَمْتُ، وَإِلَيْكَ حَاكَمْتُ، فَاغْفِرْ لِيْ مَا قَدَّمْتُ وَمَا أَخَّرْتُ، وَمَا أَسْرَرْتُ وَمَا أَعْلَنْتُ، أَنْتَ الْمُقَدِّمُ وَأَنْتَ الْمُؤَخِّرُ، لَا إِلٰهَ إِلَّا أَنْتَ

Tahajjud Ki Dua In Hindi
Tahajjud Ki Dua

Tahajjud Ki Dua in Hindi

अल्लाहुम्मा लकल हम्दु अन्ता नूरुस समावाति वल अर्ज़ि व मन फ़ीहिन्न, व लकल हम्दु अन्ता क़य्यिमुस समावाति वल अर्ज़ि व मन फ़ीहिन्न, व लकल हम्दु अन्तल हक़्क़ु, व वअ्दुकल हक़्क़ु, व लिक़ाउका हक़्क़ुन, व क़ौलुका हक़्क़ुन, वल जन्नतु हक़्क़ुन, वन नारु हक़्क़ुन, वन नबिय्यूना हक़्क़ुन, व मुहम्मदुन ﷺ हक़्क़ुन, वस साअतु हक़्क़ुन। अल्लाहुम्मा लका अस्लम्तु, व बिका आमन्तु, व अलैका तवक्कल्तु, व इलैका अनब्तु, व बिका ख़ासम्तु, व इलैका हाकम्तु, फ़ग़फ़िर ली मा क़द्दम्तु व मा अख़्ख़र्तु, व मा अस्रर्तु व मा अअ्लन्तु, अन्तल मुक़द्दिमु व अन्तल मुअख़्ख़िरु, ला इलाहा इल्ला अन्त।

Tahajjud Ki Dua in English

Allahumma lakal hamdu anta noorus samawati wal ardi wa man feehinn, wa lakal hamdu anta qayyimus samawati wal ardi wa man feehinn, wa lakal hamdu antal haqq, wa wa’dukal haqq, wa liqa’uka haqq, wa qauluka haqq, wal jannatu haqq, wan naru haqq, wan nabiyyoona haqq, wa Muhammadun haqq, was sa’atu haqq. Allahumma laka aslamtu, wa bika amantu, wa ‘alaika tawakkaltu, wa ilaika anabtu, wa bika khasamtu, wa ilaika hakamtu, faghfir li ma qaddamtu wa ma akhkhartu, wa ma asrartu wa ma a’lantu, antal muqaddimu wa antal mu’akhkhiru, la ilaha illa ant.

तहज्जुद की दुआ का तर्जुमा

ऐ अल्लाह! तेरे ही लिए तारीफ़ है, तू आसमानों, ज़मीन और उनमें मौजूद हर चीज़ का नूर है। तेरे ही लिए तारीफ़ है, तू आसमानों, ज़मीन और उनमें मौजूद हर चीज़ को क़ायम रखने वाला है। तेरे ही लिए तारीफ़ है, तू हक़ है, तेरा वादा हक़ है, तुझसे मुलाक़ात हक़ है, तेरी बात हक़ है, जन्नत हक़ है, जहन्नम हक़ है, सब नबी हक़ हैं, मुहम्मद ﷺ हक़ हैं और क़यामत हक़ है। ऐ अल्लाह! मैं तेरा फ़रमाँबरदार हुआ, तुझ पर ईमान लाया, तुझ पर भरोसा किया, तेरी तरफ़ रुजू किया, तेरी ही मदद से (हक़ के लिए) झगड़ा किया और तुझसे ही फ़ैसला चाहा। तो मेरे अगले-पिछले, छुपे और खुले सब गुनाह माफ़ कर दे। तू ही आगे बढ़ाने वाला और पीछे करने वाला है, तेरे सिवा कोई माबूद नहीं।

रात को जागते ही पढ़ने वाली दुआ

तहज्जुद के लिए आँख खुलते ही ये पढ़ें। नबी ﷺ ने फ़रमाया कि इसके बाद जो दुआ माँगी जाए वो क़बूल होती है, और वुज़ू करके नमाज़ पढ़े तो नमाज़ क़बूल होती है: (सहीह बुख़ारी: 1154)

لَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ وَحْدَهٗ لَا شَرِيْكَ لَهٗ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيْرٌ، اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ، وَسُبْحَانَ اللّٰهِ، وَلَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ، وَاللّٰهُ أَكْبَرُ، وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللّٰهِ

हिंदी: ला इलाहा इल्लल्लाहु वह्दहू ला शरी-क लहू, लहुल मुल्कु व लहुल हम्दु व हु-व अला कुल्लि शैइन क़दीर, अल्हम्दुलिल्लाह, व सुब्हानल्लाह, व ला इलाहा इल्लल्लाह, वल्लाहु अकबर, व ला हौला व ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह। फिर कहें: अल्लाहुम्मग़फ़िर ली (ऐ अल्लाह मुझे बख़्श दे)।

तहज्जुद के बाद दुआ कैसे माँगें?

  1. तहज्जुद की नमाज़ (2, 4, 6 या 8 रकात) पढ़ने के बाद बैठ जाएँ।
  2. पहले अल्लाह की तारीफ़ करें और दुरूद शरीफ़ पढ़ें।
  3. फिर अपने गुनाहों की माफ़ी माँगें (इस्तिग़फ़ार)।
  4. फिर अपनी, घरवालों की और पूरी उम्मत की दुनिया और आख़िरत की ज़रूरतें माँगें। अपनी ज़बान में भी माँग सकते हैं।
  5. आख़िर में फिर दुरूद पढ़कर “आमीन” कहें।

ये वक़्त क्यों ख़ास है: हमारा रब हर रात आख़िरी तिहाई हिस्से में आसमान-ए-दुनिया पर नुज़ूल फ़रमाता है और कहता है: कौन है जो मुझसे दुआ करे कि मैं क़बूल करूँ, कौन माँगे कि मैं दूँ, कौन माफ़ी माँगे कि मैं माफ़ करूँ। (सहीह बुख़ारी: 1145)

तहज्जुद की रकात और वक़्त

तहज्जुद कम से कम 2 रकात है, और नबी ﷺ आम तौर पर 8 रकात और फिर वित्र पढ़ते थे (बुख़ारी: 1147)। सबसे अच्छा वक़्त रात का आख़िरी तिहाई हिस्सा है। पूरी जानकारी: तहज्जुद की रकात | तहज्जुद का तरीका

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

तहज्जुद की दुआ कब पढ़ी जाती है?

नबी ﷺ ये दुआ रात को तहज्जुद के लिए खड़े होते वक़्त पढ़ते थे (बुख़ारी: 1120)। आप इसे नमाज़ शुरू करने से पहले या नमाज़ के बाद पढ़ सकते हैं।

क्या ये दुआ याद न हो तो तहज्जुद नहीं होगी?

तहज्जुद हो जाएगी। दुआ पढ़ना सुन्नत है, शर्त नहीं। जब तक याद न हो, देखकर पढ़ें या अपनी ज़बान में दुआ माँगें।

तहज्जुद के बाद कौन सी दुआ माँगें?

कोई भी दुआ माँग सकते हैं। इस्तिग़फ़ार, “रब्बना आतिना…” और अपनी ज़रूरतें, सब माँगें।

क्या तहज्जुद के वक़्त की दुआ क़बूल होती है?

हाँ, रात का आख़िरी हिस्सा दुआ क़बूल होने का ख़ास वक़्त है (बुख़ारी: 1145)।

क्या औरतें भी तहज्जुद पढ़ सकती हैं?

हाँ, तहज्जुद मर्द और औरत दोनों के लिए है।

तहज्जुद की नियत क्या है?

पूरी नियत यहाँ पढ़ें: तहज्जुद की नियत

आख़िरी बात

रात के सन्नाटे में, जब सब सो रहे हों, अल्लाह के सामने खड़े होकर ये दुआ पढ़ना ईमान को ताज़ा कर देता है। शुरुआत हफ़्ते में एक रात और 2 रकात से करें, और इस ख़ास वक़्त में अपनी हर ज़रूरत अल्लाह से माँगें।

ये भी पढ़ें: तहज्जुद की रकात | तहज्जुद का तरीका | सोकर उठने की दुआ | दुआ माँगने का तरीका

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