Fajar Ki Namaz Ki Rakat Kitni Hoti Hai? (4 रकात: 2 सुन्नत + 2 फ़र्ज़)

Fajar Ki Namaz Ki Rakat: फ़ज्र की नमाज़ में कुल 4 रकात होती हैं: पहले 2 रकात सुन्नत-ए-मुअक्कदा, फिर 2 रकात फ़र्ज़। फ़ज्र के फ़र्ज़ के बाद कोई सुन्नत या नफ़्ल नहीं है। नीचे पढ़ने की तरतीब, नियत, वक़्त और फ़ज्र की सुन्नत से जुड़े अहम मसले हदीस के हवाले से दिए गए हैं।

Fajar Ki Namaz Ki Rakat: एक नज़र में

क्रमरकातक़िस्महुक्म
12सुन्नत-ए-मुअक्कदाबहुत ताकीद वाली, न छोड़ें
22फ़र्ज़फ़र्ज़, जमाअत के साथ

कुल: 4 रकात। इनमें 2 फ़र्ज़ हैं, जिनका छोड़ना बड़ा गुनाह है।

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फ़ज्र की नमाज़ पढ़ने की तरतीब

  1. सुबह सादिक़ (फ़ज्र का वक़्त) शुरू होने के बाद पहले 2 रकात सुन्नत अकेले पढ़ें। नबी ﷺ इनमें अक्सर पहली रकात में सूरह काफ़िरून और दूसरी में सूरह इख़लास पढ़ते थे। (सहीह मुस्लिम: 726)
  2. फिर 2 रकात फ़र्ज़ पढ़ें। मर्द मस्जिद में जमाअत के साथ पढ़ें। फ़ज्र के फ़र्ज़ में इमाम क़िरात बुलंद आवाज़ से करता है।
  3. सलाम के बाद नमाज़ के बाद की तस्बीह और दुआएँ पढ़ें।

फ़ज्र की नमाज़ की नियत

फ़र्ज़ की नियत: “नियत की मैंने दो रकात नमाज़ फ़र्ज़, वक़्त फ़ज्र का, वास्ते अल्लाह तआला के, (इमाम के पीछे हों तो: पीछे इस इमाम के), मुँह मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर।”
सुन्नत की नियत: “नियत की मैंने दो रकात नमाज़ सुन्नत, वक़्त फ़ज्र का, सुन्नत रसूलुल्लाह ﷺ की, वास्ते अल्लाह तआला के, मुँह मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर।”

नियत असल में दिल के इरादे का नाम है। ज़बान से कहना ज़रूरी नहीं, लेकिन कह लेना बेहतर है। पूरी जानकारी: फ़ज्र की नमाज़ की नियत

फ़ज्र की नमाज़ का वक़्त

फ़ज्र का वक़्त सुबह सादिक़ (पूरब में सफ़ेदी फैलने) से शुरू होकर सूरज निकलने तक रहता है। सूरज निकलना शुरू हो जाए तो फ़ज्र का वक़्त ख़त्म हो जाता है, और उस वक़्त नमाज़ पढ़ना मना है। अपने शहर का सही वक़्त किसी भरोसेमंद नमाज़ टाइम टेबल से देखें।

फ़ज्र की नमाज़ की फ़ज़ीलत

  • दुनिया से बेहतर: फ़ज्र की दो रकात (सुन्नत) दुनिया और जो कुछ उसमें है, उससे बेहतर हैं। (सहीह मुस्लिम: 725)
  • अल्लाह की हिफ़ाज़त: जिसने फ़ज्र की नमाज़ पढ़ी, वो अल्लाह की हिफ़ाज़त (ज़िम्मे) में है। (सहीह मुस्लिम: 657)
  • पूरी रात इबादत का सवाब: जिसने ईशा जमाअत से पढ़ी, गोया उसने आधी रात इबादत की, और जिसने फ़ज्र भी जमाअत से पढ़ी, गोया उसने पूरी रात इबादत की। (सहीह मुस्लिम: 656)

फ़ज्र की सुन्नत से जुड़े अहम मसले

  • जमाअत खड़ी हो जाए तो: हनफ़ी मसलक में अगर जमाअत की कम से कम आख़िरी रकात मिलने की उम्मीद हो, तो सफ़ से अलग हटकर पहले सुन्नत पढ़ लें, फिर जमाअत में शामिल हों। वरना सीधे जमाअत में शामिल हो जाएँ।
  • सुन्नत छूट जाए तो: नबी ﷺ ने फ़रमाया कि जिसने फ़ज्र की दो रकात (सुन्नत) न पढ़ी हों, वो सूरज निकलने के बाद पढ़ ले। (तिर्मिज़ी: 423) हनफ़ी मसलक में इन्हें सूरज निकलने के बाद ज़वाल से पहले पढ़ा जाता है, फ़र्ज़ के फ़ौरन बाद नहीं।
  • सुन्नत हल्की पढ़ें: नबी ﷺ फ़ज्र की सुन्नत बहुत मुख़्तसर पढ़ते थे। (सहीह बुख़ारी: 1171)

5 वक़्त की नमाज़ की कुल रकात

नमाज़कुल रकात
फ़ज्र4
ज़ुहर12
अस्र8
मग़रिब7
ईशा17
जुमा (ज़ुहर की जगह)14

सुन्नत, फ़र्ज़ और नफ़्ल का पूरा चार्ट: नमाज़ की रकात चार्ट

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

फ़ज्र की नमाज़ में कितनी रकात होती हैं?

कुल 4 रकात: पहले 2 सुन्नत-ए-मुअक्कदा, फिर 2 फ़र्ज़।

फ़ज्र में पहले सुन्नत पढ़ें या फ़र्ज़?

पहले 2 सुन्नत, फिर 2 फ़र्ज़। फ़ज्र के फ़र्ज़ के बाद कोई सुन्नत नहीं है।

क्या फ़ज्र की सुन्नत छोड़ सकते हैं?

फ़ज्र की सुन्नत सबसे ज़्यादा ताकीद वाली सुन्नत है, नबी ﷺ ने इन्हें दुनिया से बेहतर बताया (मुस्लिम: 725)। इन्हें न छोड़ें।

फ़ज्र की सुन्नत छूट जाए तो कब पढ़ें?

हनफ़ी मसलक में सूरज निकलने के बाद और ज़वाल से पहले पढ़ें (तिर्मिज़ी: 423)।

फ़ज्र की नमाज़ का वक़्त कब तक है?

सुबह सादिक़ से सूरज निकलने तक।

अगर सूरज निकलते वक़्त नींद खुले तो?

सूरज पूरी तरह निकल आने (लगभग 15-20 मिनट) तक इंतज़ार करें, फिर फ़ज्र की क़ज़ा पढ़ें।

आख़िरी बात

फ़ज्र की 4 रकात दिन की सबसे पहली और सबसे भारी इबादत है, लेकिन इसका इनाम भी सबसे बड़ा है। पहले 2 सुन्नत, फिर 2 फ़र्ज़। इन्हें पाबंदी से पढ़ें और अल्लाह की हिफ़ाज़त में अपना दिन शुरू करें।

ये भी पढ़ें: फ़ज्र की नमाज़ का तरीका | फ़ज्र की नियत | नमाज़ की रकात चार्ट | क़ज़ा नमाज़ का तरीका

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