Sone Ki Dua in Hindi: सोने से पहले और उठने की दुआ

Sone ki Dua: रात को सोने से पहले की दुआ बहुत छोटी है: “अल्लाहुम्मा बिस्मिका अमूतु व अह्या”, यानी “ऐ अल्लाह! तेरे ही नाम से मैं मरता (सोता) हूँ और जीता (जागता) हूँ।” नबी ﷺ हर रात बिस्तर पर लेटते वक़्त यही दुआ पढ़ते थे। (सहीह बुख़ारी: 6312)

इस पोस्ट में आपको सोने की दुआ अरबी, हिंदी और इंग्लिश में मिलेगी। साथ ही सुबह उठने की दुआ, सोने से पहले के 6 सुन्नत अमल (हदीस के हवाले के साथ) और बुरा ख़्वाब आने पर क्या करें, ये सब भी बताया गया है।

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सोने की दुआ एक नज़र में

दुआअल्लाहुम्मा बिस्मिका अमूतु व अह्या
कब पढ़ेंबिस्तर पर लेटकर, आँख बंद करने से पहले
कैसे लेटेंदाईं करवट, दायाँ हाथ गाल के नीचे
हवालासहीह बुख़ारी: 6312
उठने की दुआअल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अह्याना बादा मा अमातना व इलैहिन नुशूर

Sone Ki Dua in Arabic

اَللّٰهُمَّ بِاسْمِكَ أَمُوْتُ وَأَحْيَا

Sone Ki Dua in Hindi

अल्लाहुम्मा बिस्मिका अमूतु व अह्या

Sone Ki Dua in English

Allahumma bismika amootu wa ahya

सोने की दुआ का तर्जुमा

हिंदी: ऐ अल्लाह! तेरे ही नाम से मैं मरता हूँ और (तेरे ही नाम से) ज़िंदा होता हूँ।

English: O Allah, in Your name I die and I live.

नींद को “मौत” क्यों कहा गया?

इस्लाम में नींद को “छोटी मौत” कहा गया है। क़ुरआन में अल्लाह फ़रमाता है कि वही रूहों को मौत के वक़्त और सोते वक़्त क़ब्ज़ करता है। (सूरह ज़ुमर 39:42) इसलिए सोते वक़्त बंदा ख़ुद को अल्लाह के हवाले करता है, और जागने पर अल्लाह का शुक्र अदा करता है कि उसने फिर से ज़िंदगी दी।

सुबह उठने की दुआ (So Kar Uthne Ki Dua)

सोने की दुआ के साथ ही जागने की दुआ भी याद कर लें। नबी ﷺ नींद से उठकर ये पढ़ते थे: (सहीह बुख़ारी: 6312)

अरबी:

اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذِيْ أَحْيَانَا بَعْدَ مَا أَمَاتَنَا وَإِلَيْهِ النُّشُوْرُ

हिंदी: अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अह्याना बादा मा अमातना व इलैहिन नुशूर

English: Alhamdu lillahil-lazi ahyana ba’da ma amatana wa ilaihin-nushoor

तर्जुमा: सब तारीफ़ अल्लाह के लिए है जिसने हमें मौत (नींद) के बाद ज़िंदगी दी, और उसी की तरफ़ लौटकर जाना है।

पूरी जानकारी के लिए पढ़ें: सो कर उठने की दुआ

सोने से पहले के 6 सुन्नत अमल

सिर्फ़ दुआ ही नहीं, नबी ﷺ सोने से पहले कुछ और अमल भी करते थे। इन्हें अपनी आदत बना लें:

1. वुज़ू करके सोना

नबी ﷺ ने फ़रमाया: जब तुम बिस्तर पर जाओ तो नमाज़ जैसा वुज़ू कर लो, फिर दाईं करवट लेटो। (सहीह बुख़ारी: 247)
वुज़ू का पूरा तरीका यहाँ पढ़ें

2. बिस्तर को झाड़ लेना

नबी ﷺ ने फ़रमाया कि बिस्तर पर जाने से पहले उसे कपड़े के किनारे से तीन बार झाड़ लो, क्योंकि तुम्हें नहीं पता कि तुम्हारे बाद उस पर क्या आया। (सहीह बुख़ारी: 6320)

3. आयतुल कुर्सी पढ़ना

हदीस में है कि जो सोते वक़्त आयतुल कुर्सी पढ़े, अल्लाह की तरफ़ से उसकी हिफ़ाज़त के लिए एक निगहबान रहता है और सुबह तक शैतान उसके क़रीब नहीं आता। (सहीह बुख़ारी: 2311)
आयतुल कुर्सी हिंदी में पढ़ें

4. तीनों क़ुल पढ़कर हाथों पर दम करना

नबी ﷺ हर रात बिस्तर पर जाकर दोनों हथेलियाँ मिलाते, उनमें सूरह इख़लास, सूरह फ़लक़ और सूरह नास पढ़कर फूँकते, फिर जहाँ तक हो सके पूरे जिस्म पर हाथ फेरते। सिर, चेहरे और जिस्म के आगे के हिस्से से शुरू करते, और ऐसा तीन बार करते। (सहीह बुख़ारी: 5017)
सूरह इख़लास हिंदी में पढ़ें

5. तस्बीह-ए-फ़ातिमा पढ़ना

नबी ﷺ ने हज़रत अली और हज़रत फ़ातिमा (रज़ि.) को सिखाया कि सोते वक़्त 33 बार सुब्हानल्लाह, 33 बार अल्हम्दुलिल्लाह और 34 बार अल्लाहु अकबर पढ़ें, और फ़रमाया कि ये तुम्हारे लिए ख़ादिम से बेहतर है। (सहीह बुख़ारी: 6318)

6. दाईं करवट लेटकर दुआ पढ़ना

दाईं करवट लेटें, दायाँ हाथ गाल के नीचे रखें और फिर सोने की दुआ पढ़ें। (सहीह बुख़ारी: 6312)

याद रखने का आसान तरीका: वुज़ू, बिस्तर झाड़ना, आयतुल कुर्सी, तीन क़ुल, तस्बीह और फिर दाईं करवट लेटकर दुआ। ये पूरा अमल 5 मिनट से भी कम में हो जाता है।

सूरह मुल्क: रात की ख़ास सूरत

नबी ﷺ तब तक नहीं सोते थे जब तक सूरह सज्दा और सूरह मुल्क न पढ़ लेते। (तिर्मिज़ी: 2892) सूरह मुल्क के बारे में आया है कि ये अपने पढ़ने वाले के लिए सिफ़ारिश करेगी, यहाँ तक कि उसे बख़्श दिया जाए। (तिर्मिज़ी: 2891)

अगर रोज़ पूरी सूरह मुल्क न पढ़ सकें, तो कम से कम ऊपर के 6 अमल ज़रूर कर लें।

बुरा ख़्वाब आए तो क्या करें?

अगर रात में डरावना या बुरा ख़्वाब आ जाए, तो नबी ﷺ ने ये तालीम दी है: (सहीह मुस्लिम: 2262)

  1. बाईं तरफ़ तीन बार हल्का सा थुथकार दें (थूक के बग़ैर)।
  2. तीन बार “अऊज़ु बिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम” पढ़ें।
  3. जिस करवट लेटे थे, उसे बदल लें।
  4. वो ख़्वाब किसी को न बताएँ।

बच्चों को सोने की दुआ कैसे सिखाएँ?

  • रोज़ रात बच्चे के साथ लेटकर ख़ुद ज़ोर से दुआ पढ़ें। बच्चा सुन-सुनकर 1-2 हफ़्ते में याद कर लेता है।
  • पहले सिर्फ़ छोटी दुआ (“अल्लाहुम्मा बिस्मिका अमूतु व अह्या”) याद कराएँ। फिर धीरे-धीरे तीन क़ुल और आयतुल कुर्सी जोड़ें।
  • बच्चे को आसान ज़बान में मतलब बताएँ: “हम अल्लाह का नाम लेकर सो रहे हैं, अल्लाह हमारी हिफ़ाज़त करेगा।”

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

सोने की सबसे छोटी दुआ कौन सी है?

सोने की सबसे छोटी और मशहूर दुआ “अल्लाहुम्मा बिस्मिका अमूतु व अह्या” है। ये सहीह बुख़ारी (6312) से साबित है।

क्या बिना वुज़ू के सो सकते हैं?

हाँ, बिना वुज़ू सोना जायज़ है, ये गुनाह नहीं है। लेकिन वुज़ू करके सोना सुन्नत है और इसका बड़ा सवाब है। (सहीह बुख़ारी: 247)

सोते वक़्त कौन सी सूरह पढ़नी चाहिए?

आयतुल कुर्सी, सूरह इख़लास, सूरह फ़लक़, सूरह नास और सूरह मुल्क पढ़ना हदीस से साबित है।

क्या पेट के बल सोना मना है?

नबी ﷺ ने एक शख़्स को पेट के बल लेटे देखा तो फ़रमाया कि इस तरह लेटना अल्लाह को पसंद नहीं। (तिर्मिज़ी: 2768) इसलिए दाईं करवट सोना बेहतर है।

“बिस्मिका अल्लाहुम्मा” और “अल्लाहुम्मा बिस्मिका”, कौन सा सही है?

दोनों अल्फ़ाज़ हदीसों में आए हैं और दोनों सही हैं। मतलब भी एक ही है।

अगर सोने की दुआ पढ़ना भूल जाएँ तो?

जब भी याद आए, लेटे-लेटे पढ़ लें। अगर नींद आ गई तो कोई गुनाह नहीं है।

आख़िरी बात

सोने की दुआ छोटी है, लेकिन इसके पीछे बड़ा पैग़ाम है: हर रात हम ख़ुद को अल्लाह के हवाले करते हैं, और हर सुबह उसकी दी हुई नई ज़िंदगी का शुक्र अदा करते हैं। आज रात से ही ये दुआ और ऊपर के सुन्नत अमल शुरू करें, और अपने बच्चों को भी सिखाएँ।

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